Meditation and Its Practice Quotes

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Meditation and Its Practice Meditation and Its Practice by Swami Rama Himalayan Institute
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“आत्मन् : विशुद्ध चेतना, सच्चा स्व, अपरिवर्तनीय शाश्वत सत्य, जो संपूर्ण प्रकट संसार से भी कहीं परे है। ओम : एक ऐसी ध्वनि जो परम तत्व का प्रतिनिधित्व करती है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“इस तरह श्वास छोड़ें मानो आपका पूर शरीर श्वास छोड़ रहा हो और इस तरह श्वास लें मानो आपका पूरा शरीर श्वास ले रहा हो। अपने सारे, तनाव चिंता व उद्वेगों को त्याग दें। जीवंत ऊर्जा, शांति तथा शिथिलता की श्वास भीतर लें और अब चार बार पूरी तरह से श्वास लें व छोड़ें।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“समस्याओं का समाधान हो चुका होता है। मन की यही आनंदमयी अवस्था बाहरी जगत में प्रशांति तथा आंतरिक जगत में स्थायी शांति लाने का कारण बनती है। ऐसे साधक प्रतिक्षण सत्य के प्रति जागरूक रहते हैं और कभी भयभीत नहीं होते, क्योंकि वे अपनी प्रत्येक श्वास के साथ जीवन के दाता को याद रखते हैं”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“यदि आप अपने सभी मानवीय प्रयासों के बाद भी आंतरिक शांति न पा सकें, तो अपने - आप को उस सर्वशक्तिमान, जीवनरूपी प्रभु को समर्पित कर दें।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“मैं शिष्यों को परामर्श देता हूँ कि वे अपने भीतर बैठे परम शक्तिशाली प्रभु से प्रार्थना करें, हृदय से की गई प्रार्थनाएँ सदा फलीभूत होती हैं।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“शिष्य के मन में आंतरिक सत्य को जानने व अखंड निष्ठा के साथ कुछ खोजने की इच्छा उत्पन्न होती है, जब वह पूरी तरह तैयार है तो गुरु स्वयं प्रकट हो जाते हैं।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“मौन से शांति, प्रसन्नता व परमानंद का उदय होता है। ध्यान के साधक उस मौन को ही व्यक्तिगत धाम बना लेते है। यही ध्यान का चरम लक्ष्य है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“आप मेरे प्रश्नों के उत्तर क्यों नहीं दे रहे?” संत ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तो उत्तर दे रहा हूँ, तुम ही नहीं सुन रहे। ईश्वर मौन है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“ध्यान का अंतिम चरण यही है कि हम मौन के बीच जीना सीख सकें। इस मौन का वर्णन नहीं हो सकता। यह अवर्णनीय है। यही मौन, अंतर्जात ज्ञान के द्वार खोलता है और तब साधक के सम्मुख अतीत, वर्तमान और भविष्य किसी किसी पुस्तक के पन्नों की तरह खुलते चले जाते हैं।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“जीवन में छिपी वास्तविकता को जानते हैं, और जिन्होंने पहले ही संसार के आनंद व सुखों को जान लिया है, उन्होंने पाया है कि वे ध्यान का अभ्यास किए बिना वास्तविक संतुष्टि पा ही नहीं सकते।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“समाधि के अनेक स्तर हैं, जो कि गहन रूप से मग्न ध्यानावस्था है। जब आप अपने मन को पूरे दस मिनट तक बिना किसी बाधा के केंद्रित कर सकते हैं तो जान लें कि आपने इस लक्ष्य को पा लिया है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“मनुष्य की भावनाओं में असीम शक्ति है, जो प्राय: मनरूपी झील की सतह के नीचे से काम करती है, जिस प्रकार कोई शार्क मछली, जल के नीचे तैर रही हो। यदि उस भाव को देखा न जाए, तो यह सारे जल को दूषित कर सकता है। आपको इस प्रक्रिया में, अपने प्रति धैर्य रखना सीखना होगा। यदि आप अपनी विचार प्रक्रिया को परखने से डरते हैं, तो यह आपकी ओर से भारी भूल होगी।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“अपने विचारों का साक्षी बनना सीखें तथा अपनी मानसिक गाड़ी में चल रहे दृश्यों, भावनाओं, अवधारणाओं, स्मृतियों आदि से अविचलित, अप्रभावित तथा अलिप्त रहना सीखें।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“गहन ध्यानपरक विधियों के सहयोग से, अचेतन के गहन आंतरिक तल में डूबना सीखते हैं और बहुत ही व्यवस्थित रूप से इसकी क्षमताओं का प्रयोग करना सीख जाते हैं।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“जब आप दोनों नथुनों के मध्य में, सुबह और शाम नियमित रूप से मन को केंद्रित करते हैं, तो आप पाएँगे कि मन आसानी से एक आनंदमयी अवस्था में आ जाता है। तब आप बार–बार इस अवस्था में आने के लिए उत्सुक होते हैं”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“आपको श्वास के प्रवाह पर सजगता केंद्रित रखनी है, यह नथुनों के बीच, ऊपरी होंठ के ठीक ऊपर, नथुनों के जोड़ पर है। जब आप मन को यहाँ केंद्रित करते हैं, तो आप शीघ्र ही पाएँगे कि दोनों नथुनों में सहजता से प्रवाह हो रहा है। इसे संध्या कहते हैं, सूर्य व चंद्र का मिलन, पिंगला व इड़ा का संयोग। यह एक आनंददायी समय है जिसमें कोई भी चिंता, भय या नकारात्मक भाव मन को बाधित नहीं कर सकता।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“मन को शांत व आनंदित बनाने की प्रक्रिया, ताकि यह ध्यान के अभ्यास में आनंद का अनुभव पा सके। यह पद्धति सुषुम्णा जागरण कहलाती है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“बायीं ओर से श्वास लेने पर शीतल प्रभाव होता है, जबकि दाहिनी ओर से श्वास लेने पर गर्माहट का एहसास होता है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“सजगता को स्थापित करने का प्रयास करें कि आपकी श्वास का प्रवाह आपकी सजग इच्छा से निर्देशित हो सकता है, केवल आपको उस पर ध्यान देना है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“श्वास और मन, जीवन के दो जुड़वाँ नियम हैं। वे दोनों एक–दूसरे के निकट हैं और एक–दूसरे को परस्पर प्रभावित करते हैं।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“एक विशुद्ध दूधिया नाड़ी के माध्यम से श्वास लेना व छोड़ना है। आपको उस ऊर्जा के सूक्ष्म प्रवाह को अनुभव करना होगा, जो आपके मस्तिष्क के मूल से, शरीर के निचले हिस्से तक जा रहा है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“यह हज़ारों वर्षों की परंपरा से चले आ रहे मुनियों व गुरुओं के अनुभवों का केंद्र है। इस तरह श्वास को भीतर लें मानो आप मेरुदंड के आधार से, सिर के सहस्रार तक श्वास ले रहे हों, इस प्रक्रिया में कोई विध्न न आने दें। इस तरह श्वास छोड़े मानो आप सिर के ऊपरी हिस्से ले कर, रीढ की हड्डी के निचले हिस्से तक श्वास को छोड़ रहे हों।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“अज्ञानता ही सभी रोग, असुविधा, पीड़ा व कष्टों की जननी है। एक शुद्ध, शांत व प्रशांत मन ही सकारात्मक व स्वस्थ है। ध्यान की प्रक्रिया मन को उपयोगी व रचनात्मक साधन बने रहने में सहायता करती है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“अहंकार का अर्थ है, ‘मैं’, व्यक्तिगत अहं, जो अपने–आप में एक अलग अस्तित्व का स्वामी लगता है। यह हमें पहचान का भाव तो देता है परंतु इसके साथ ही अलगाव और पीड़ा का भाव भी पैदा करता है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“बुद्धि मन का उच्चतम पक्ष है, यह आंतरिक विवेक व प्रज्ञा का प्रवेश द्वार है। इसके पास निर्णय करने, परखने तथा विवेकपूर्ण अंतर करने की क्षमता पाई जाती है।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“मनस् निम्नतम मन है, जिसके साथ हम बाहरी जगत से अपना संपर्क रखते हैं और ऐंद्रिक संस्कारों व विवरणों को ग्रहण करते हैं। मनस् के पास संदेह करने व प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति है,”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“अपनी गहनतम प्रकृति को जानना होगा। जब हम अपने आंतरिक स्व के प्रति सजग हो जाते हैं तो हम गंभीरतापूर्वक अनेक रोगों का उपचार कर सकते हैं”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“प्रशिक्षण का सबसे आरंभिक चरण यह है कि मन को उस सजगता से परिचित करवाया जाए, जो मन के पीछे छिपी है : वह अमूर्त आत्मा। मन एक अलग तथा वैयक्तिक सत्ता है, परंतु इसका कोई अलग अस्तित्व नहीं है। यह केवल आत्मा के अस्तित्व के कारण ही अस्तित्व रखती है। यह”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“ध्यान को पेट के निचले हिस्से पर केंद्रित करें। पेडू के आसपास, नितंबों,जांघों, घुटनों, पिंडलियों तथा पैरों का मानसिक सर्वेक्षण करें।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)
“जब कभी अपने ध्यान का आरंभ करें, मानसिक रूप से शरीर का सर्वेक्षण करें।”
Swami Rama, Dhyan Sadhna ka Saral Abhyas (Meditation and Its Practice) (Hindi)

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