Nyoonatam Main Quotes
Nyoonatam Main
by
Geet Chaturvedi39 ratings, 4.36 average rating, 3 reviews
Nyoonatam Main Quotes
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“तुम्हारे लिए जो कविताएं नहीं लिखीं मैंने,
वे कविताओं से ज़्यादा हैं.
जो संगीत नहीं रचा मैंने, वह संगीत से ज़्यादा है.
जो वचन मैंने नहीं निभाए,
सो इसलिए कि हमारे बीच सब कुछ ख़त्म न हो जाए.
तुम तकाज़ा करती रहो और गुंजाइशें बची रहें.”
― Nyoonatam Main
वे कविताओं से ज़्यादा हैं.
जो संगीत नहीं रचा मैंने, वह संगीत से ज़्यादा है.
जो वचन मैंने नहीं निभाए,
सो इसलिए कि हमारे बीच सब कुछ ख़त्म न हो जाए.
तुम तकाज़ा करती रहो और गुंजाइशें बची रहें.”
― Nyoonatam Main
“उससे दूर रहो जिसमें हीनभावना होती है
तुम उसकी हीनता को दूर नहीं कर पाओगे
ख़ुद को श्रेष्ठ बताने के चक्कर में
वह रोज़ तुम्हारी हत्या करेगा”
― Nyoonatam Main
तुम उसकी हीनता को दूर नहीं कर पाओगे
ख़ुद को श्रेष्ठ बताने के चक्कर में
वह रोज़ तुम्हारी हत्या करेगा”
― Nyoonatam Main
“अर्जुन ने जिस तीर से अश्वत्थामा पर प्रहार किया था, उसका नाम वत्सदंत था। वत्स यानी गाय का बछड़ा, दंत यानी दाँत। गाय के बछड़े के दाँत इतने पैने नहीं होते कि वह काटे, तो अंग-भंग हो जाए; पर चोटिल अवश्य करते हैं। वत्सदंत तीर भी इतना घातक नहीं था कि प्राण ले ले, लेकिन ऐसा भी न था कि छूकर गुज़र जाए। चोट गहरी देता, जान न लेता। कहीं वत्सदंत, प्रेम की अनुभूति का तीर में रूपांकन तो नहीं?”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“उस लाश की आँखें खुली थीं जैसे कोई कंप्यूटर को शटडाउन करना भूल गया हो”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“जिसका शरीर 19वीं सदी के रूसी उपन्यासों की तरह था”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“काफ़्का को घबराहट होती थी प्राग की ज़मीन के नीचे कोई चलता रहता है लगातार”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“शर्ट का जो हिस्सा पैंट के भीतर रहता है उसके पास भी सुनाने को कई कहानियाँ हैं”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“मेरे कुरते पर कलफ़ की तरह लगी हैं जीवन की दुर्घटनाएँ”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“दीवार और दरवाज़े और खिड़कियों के पल्लों में क्या बातें होती हैं कभी सुना है किसी ने”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“वह आलू खाता हूँ जिसमें केकड़ों के गुणसूत्र भरे”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“हमने गोल्ड स्पॉट पीने की ज़िद एक ही बार की थी”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“साहित्य कुबड़ों का टूर्नामेंट है —चेस्वाव मीवोश”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“आँसू के बिना कोई प्रार्थना लिखी ही नहीं गई इस दुनिया में”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“बिना पेंसिल उठाए हँसते चेहरे का चित्र बना लेने वालों के हुनर से हमेशा घबराया”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“यासुजिरो ओज़ू की फ़िल्मों के लिए अगर तुम एक देश बनाते, तो वह एक मौन देश होता : तुम्हारे रचे शब्दकोश मौन होते : तुमने कभी देवताओं के आगे हाथ नहीं जोड़ा : ताउम्र तुम एक दृश्य रचते रहे : उनमें तुम मानसिक आँसुओं की तरह अदृश्य रहे अर्थ की हर तलाश अन्तत: एक व्यर्थ है : इस धरती पर जितने बुद्ध, जितने मसीहा आए, इस व्यर्थ को कुछ नए शब्दों में अभिव्यक्त कर गए : माँ की तरफ़ से मैं पीड़ा का वंशज हूँ : पिता की तरफ़ से अकेलेपन का : जब भी मैं घर की दहलीज़ लाँघता हूँ : मैं एकान्त का इतिहास लाँघता हूँ गुप्त प्रेमी मरकर कहाँ जाते हैं? सड़क की तरफ़ खुलने वाली तुम्हारी खिड़की के सामने लगे खंभे पर बल्ब बनकर चमकते हैं उनके मर चुकने की ख़बर भी बहुत-बहुत दिनों तक नहीं मिल पाती मृत्यु का स्मरण तमाम अनैक्य का शमन करता है मेरी आँखें मेरे घुटनों में लगी हैं मैंने जीवन को हमेशा विनम्रता से झुक कर देखा थके क़दमों से एक बूढ़ा सड़क पर चला जा रहा वह विघटित है उसके विघटन का कोई अतीत मुझे नहीं पता मैं उसके चलने की शैली को देख उसके अतीत के विघटन की कल्पना करता हूँ वह अपनी सज़ा काट चुका है कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि जज साहब उसे बाइज़्ज़त बरी कर दें जो कहते हैं भविष्य दिखता नहीं, मैं उन पर यक़ीन नहीं करता मैं अपने भविष्यों को सड़कों पर भटकता देखता हूँ उसी तरह मेरे भविष्य मुझे देख अपना अतीत जान लेते हैं मैं वह शहर हूँ जिसकी वर्तनी व उच्चारण बार-बार बदल देता एक ताक़तवर राजा यह मेरी देह का भूगोल है : मैं आईने के सामने जब भी निर्वस्त्र खड़ा होता हूँ, मुझे लगता है, मैं एक भौगोलिक असफलता हूँ”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“वोंग कार-वाई की फ़िल्मों के लिए एक दिन तुम एक अपरिचित पेड़ खोजना : थोड़ी देर उससे लिपट जाना : उसके किसी एक कोटर पर मुँह रखकर फुसफुसाना : इस तरह कि ख़ुद तुम्हें न सुनाई पड़े तुमने क्या कह दिया : तुम्हारा फुसफुसाता हुआ प्रेम : प्रायश्चित्त : अपराधबोध : पीड़ा : उद्विग्नता : यह सब : फिर उस छेद को गीली मिट्टी से ढँक देना : कोई तुम्हें समझ नहीं पाया यह तुम्हारे जीवन का सबसे बड़ा राज़ : यह राज़ तुम उसे भी नहीं बताते जो तुम्हें समझ नहीं पाया पेड़ों में कोटरें क्यों होती हैं? ताकि हमारे राज़ वहाँ छिप सकें और आवारा बच्चों की तरह मटरगश्ती न करें : खँडहरों की दीवारों में कोटर : पहाड़ों के किनारों पर कोटर : सब तुम्हारे राज़ की पनाहगाह : तुम अब तक एक स्त्री की देह में बने कोटर में अपने रहस्यों को स्खलित करते आए पेड़ चाहे तो अपनी पत्तियों के रूप में उगा सकता है तुम्हारे रहस्य सबसे घना पेड़ छिपाए रखता है सबसे ज़्यादा लोगों की बातें मन, देह की भाषा बोलता है जितना देह नहीं डोलती, उससे कहीं अधिक डोलता है मन मैं इसलिए दौड़ता हूँ इतना कि शरीर का सारा नमक पसीने के रास्ते निकल जाए तब आँख पर नमक का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता मन : टूटे हुए तारों का सितार प्रेम के जलाशय में आधा पैर डुबोए बैठा जोगी हृदय हमारी देह का सबसे भारी अंग है वह कोशिकाओं से नहीं, अनुभूतियों से बनता है पहाड़ भी अनुभूतियों से बनते हैं, इसलिए अपनी जगह से खिसकते नहीं : तोते दूसरों के शब्द दोहराते हैं, अपनी मृत्यु में वे चुप्पी की उँगली पकड़ प्रवेश करते हैं : एक टेपरिकॉर्डर में कैसेट बज रहा होता है : उसमें कोई सुबक रहा है : उसे कोई नहीं सुनता : सिवाय समन्दर के : समन्दर का सारा शोर ऐसी ही लावारिस सुबकियों का गुच्छा है : मैं समन्दर के सामने खड़ा हूँ : उसके विशाल शोर के बीच अपनी महीन-सी एक प्राचीन सुबक को रेशा-रेशा पहचानता हुआ एक दिन हवा सबकुछ बहा ले जाती है एक दिन समन्दर सबकुछ लील लेता है एक दिन मिट्टी सबकुछ ढँक लेती है वह अनिवार्यत: हृदय से भी भारी गीली मिट्टी होती है”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“किसी समन्दर में सोया हूँ नींद, मृत्यु का दैनिक अभ्यास है”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“नाभि से ब्रह्मा उगाने का उद्यम करता”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“जीवन में सम्पादन की सुविधा नहीं मिलती”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“भाषा के भीतर छिपकर सोया होता है ग़लत व्याख्याओं का देवता”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“चुंबन धीरे-धीरे गोल होती एक दूरी है”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“सारे विचार दरअसल दुख के वंशज हैं”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“इच्छाएँ दुखों की पूर्वज हैं”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“होंठ दरअसल मन की आँखें हैं”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“देह इस जीवन का सबसे बड़ा संकट है”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“इच्छा देह की सबसे ईमानदार कृति है*”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“आँखें आत्मा की खिड़की हैं”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“तुम्हारी आँख के भीतर एक मछली तैरना स्थगित करती है”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“आधी रात तुम्हारे कमरे में गूँजता है पानी का कोरस”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
“तुम्हारी ख़ामोशी के सीने पर तिल की तरह उगे हैं मेरे कान”
― Nyoonatam Main
― Nyoonatam Main
