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Geet Chaturvedi

“यासुजिरो ओज़ू की फ़िल्मों के लिए अगर तुम एक देश बनाते, तो वह एक मौन देश होता : तुम्हारे रचे शब्दकोश मौन होते : तुमने कभी देवताओं के आगे हाथ नहीं जोड़ा : ताउम्र तुम एक दृश्य रचते रहे : उनमें तुम मानसिक आँसुओं की तरह अदृश्य रहे अर्थ की हर तलाश अन्तत: एक व्यर्थ है : इस धरती पर जितने बुद्ध, जितने मसीहा आए, इस व्यर्थ को कुछ नए शब्दों में अभिव्यक्त कर गए : माँ की तरफ़ से मैं पीड़ा का वंशज हूँ : पिता की तरफ़ से अकेलेपन का : जब भी मैं घर की दहलीज़ लाँघता हूँ : मैं एकान्त का इतिहास लाँघता हूँ गुप्त प्रेमी मरकर कहाँ जाते हैं? सड़क की तरफ़ खुलने वाली तुम्हारी खिड़की के सामने लगे खंभे पर बल्ब बनकर चमकते हैं उनके मर चुकने की ख़बर भी बहुत-बहुत दिनों तक नहीं मिल पाती मृत्यु का स्मरण तमाम अनैक्य का शमन करता है मेरी आँखें मेरे घुटनों में लगी हैं मैंने जीवन को हमेशा विनम्रता से झुक कर देखा थके क़दमों से एक बूढ़ा सड़क पर चला जा रहा वह विघटित है उसके विघटन का कोई अतीत मुझे नहीं पता मैं उसके चलने की शैली को देख उसके अतीत के विघटन की कल्पना करता हूँ वह अपनी सज़ा काट चुका है कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि जज साहब उसे बाइज़्ज़त बरी कर दें जो कहते हैं भविष्य दिखता नहीं, मैं उन पर यक़ीन नहीं करता मैं अपने भविष्यों को सड़कों पर भटकता देखता हूँ उसी तरह मेरे भविष्य मुझे देख अपना अतीत जान लेते हैं मैं वह शहर हूँ जिसकी वर्तनी व उच्चारण बार-बार बदल देता एक ताक़तवर राजा यह मेरी देह का भूगोल है : मैं आईने के सामने जब भी निर्वस्त्र खड़ा होता हूँ, मुझे लगता है, मैं एक भौगोलिक असफलता हूँ”

Geet Chaturvedi, Nyoonatam Main
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