मैं कृष्ण हूँ Quotes
मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
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Deep Trivedi403 ratings, 4.10 average rating, 39 reviews
मैं कृष्ण हूँ Quotes
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“I had also realised that not being aware of time was 'heaven' and the feeling of passage of time was 'hell'.”
― I am Krishna
― I am Krishna
“यूं भी ‘मां’ यदि राजा कंस की बहन थी तो पिताजी भी राजकीय घराने से ही थे। वसुदेव जी की एक पत्नी, यानी मां-रोहिणी हस्तिनापुर जैसे विशाल राज्य के मंत्री विदुरजी की बहन थी। वहीं वसुदेवजी की अपनी बहन पृथा, जिसे उनके पिता शूरसेन ने अपने मित्र वृद्ध राजा कुन्तिभोज को दान में दे दिया था तथा उसका नाम कुन्ती पड़ गया था, वह हस्तिनापुर के राजा पांडु से ब्याही गई थी। ...वैसे भी मथुरा आने का सबसे बड़ा फायदा ही यह हुआ था कि मेरा दृष्टिकोण विशाल हो गया था। यहां आने के बाद मैंने ना सिर्फ धन की महत्ता जानी थी, बल्कि अच्छे खाने-पीने व पहनने का महत्त्व भी जाना था। वहीं राजकुमारी व युवराजों के ठाठ व प्रभाव ने मुझमें बड़ा आदमी बनने की इच्छा भी जागृत कर ही दी थी। ...वरना वृन्दावन में पड़े-पड़े तो शायद ज्यादा-से-ज्यादा गांव का मुखिया बनने तक ही सोच पाता। यानी बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ा दृष्टिकोण आवश्यक है, और निश्चित ही वह विकसित नगरों और राज्यों से ही पाया जा सकता है।”
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
“अब आप ही सोचिए, इतनी सुंदर और हंसमुख औरत का यह हाल सुंदरता का यह पुजारी ‘‘कृष्ण’’ कैसे देख सकता था? कुल-मिलाकर कुब्जा का यह रोग मुझे इस बुरी तरह खल रहा था कि मैं उसके लिए कुछ करना चाहता था। सच कहूं तो मेरा मन उसे मालिनी के स्वरूप में देखने को तड़प उठा था। इतनी सुंदर स्त्री, यह उम्र और यह बीमारी...। राजवैद्य ने कह दिया कि ठीक नहीं हो सकती, ...तो क्या ठीक नहीं हो सकती? होगी व बिल्कुल होगी। वैसे भी मेरा विश्वास इलाजों से कहीं ज्यादा मन की शक्ति पर था। ...यह मेरे मन की शक्ति का ही तो कमाल था जो मैं ‘‘अरिष्ट’’ व ‘‘कालिया’’ जैसों का वध कर पाया था। यह राधा का प्रेम ही था जो मैं ‘‘केशी’’ जैसों को निपटा पाया था। तो फिर कुब्जा पर प्रेम का जादू क्यों नहीं चलेगा? ले-देकर मुझे कुब्जा का यही एक इलाज अच्छे से समझ में आ रहा था। और आगे इसी समझ के तहत मैंने उसे समझाया कि तुम राजवैद्य की राय पर बिल्कुल मत जाना। यदि तुम मन की शक्ति एकत्रित कर ठीक होने का पक्का इरादा कर लोगी तो तुम ठीक हुई ही समझो। बस एकबार पूर्ण विश्वास से मन की पूरी ‘‘संकल्प-शक्ति’’ ठीक होने में लगा दो। उसने मेरी बात ध्यान से सुनी भी, और उसका विश्वास जगाने हेतु यही बात मैंने उससे कई बार दोहराई भी। आप मानेंगे नहीं कि उस रोज मैंने कुब्जा की मालिश भी की ताकि उसे सच्चे प्रेम का एहसास दिला सकूं। यानी ना सिर्फ उसका इलाज ‘‘वैद्य-कृष्ण’’ द्वारा चालू हो गया था, बल्कि उसे अपने इस वैद्यराज द्वारा ‘‘प्रेम’’ व ‘‘विश्वास’’ की मिली-जुली जड़ी-बूटी भी पिलाई जा रही थी। मजा यह कि कुब्जा जितना मालिश करवाकर धन्य हो रही थी... उससे कहीं ज्यादा यह वैद्यराज मालिश कर धन्य हो रहे थे। खैर!”
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
“जीवन एक चुनाव है जिसका फैसला शास्त्र या नीतियों से नहीं बल्कि परिस्थिति की मांग से किया जाता है।”
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
“निश्चित ही ‘‘जानवर’’ प्रेम व भोलेपन को मनुष्य से बेहतर पहचानते हैं। मनुष्यों”
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
“स्वयं को अपने जीवन का ईश्वर मानने से आत्मविश्वास बढ़ता है,”
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon
― मैं कृष्ण हूँ: Main Krishna Hoon