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Divya Prakash Dubey
Goodreads Author
Born
in Varanasi, India
Website
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Genre
Member Since
April 2014
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Divya Prakash Dubey
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मुसाफिर Cafe
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October Junction (Preview Edition)
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मसाला चाय
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published
2014
—
3 editions
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Ibnebatuti । इब्नेबतूती
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Yaar Papa
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published
2023
—
3 editions
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Terms and Conditions Apply
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published
2013
—
3 editions
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आको बाको
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Tension Mat Le Yaar
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published
2026
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Musafir Cafe: English Edition | Now a Netflix Series
by |
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Tumhara Main
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Divya Prakash Dubey hasn't written any blog posts yet.
“मुझे शुरू से कार ड्राइव करने वाली और गाली देने वाली लड़कियाँ बहुत पसंद थीं। ऐसा लगता था कि कम-से-कम ये तो कुछ भी सहती नहीं होंगी सब अपनी मर्जी से करती होंगी”
― Terms and Conditions Apply
― Terms and Conditions Apply
“एक उम्र होती है जब क्लास की खिड़की से बाहर आसमान दूर कहीं जमीन से मिल रहा होता है और हमें लगता है कि शाम को खेलते-खेलते हम ये दूरी हम तय कर लेंगे। दूरी तय करते-करते जिस दिन हमें पता चलता है कि ये दूरी तय नहीं हो सकती, उसी दिन हम बड़े हो जाते हैं”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
“गलतियाँ सुधारनी जरुर चाहिए लेकिन मिटानी नहीं चाहिए। गलतियाँ वो पगडंडियाँ होती है जो बताती रहती हैं कि हमने शुरू कहाँ से किया था।”
― मुसाफिर Cafe
― मुसाफिर Cafe
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“इंजीनियरिंग कॉलेज में लिखने वाले लोग अक्सर ही कम होते हैं, इसलिए जो थोड़े बहुत लिखने वाले होते हैं उनकी कैमिस्ट्री तुरंत मैच कर जाती है। बातें कब किताबों से शुरू होती थी और उनके characters पर खतम। वो जो एक दूसरे से सीधे नहीं बोल पाते थे। किसी किताब में कोई-न-कोई character वो बात बोल देता था। दोनों को कई बार एक दूसरे जो बोलना होता था वो किताब में निशान लगा कर बता दिया करते थे.”
― Terms and Conditions Apply
― Terms and Conditions Apply
“इंजीनियरिंग कॉलेज में अगर कोई लड़का नोट्स बनाता है तो उसको सच्चा इंजीनियर नहीं बोला जा सकता। कभी-कभी लगता है अगर कॉलेज में लड़कियाँ ना होतीं तो कभी किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज में कोई नोट्स बन ही ना पाता। जैसा हर लड़की के साथ होता है, जैसे-जैसे वो करीब आती है उसकी टोका-टाकी बढ़ जाती है। एक दिन ऐसा भी आता है जब हॉस्टल जाने से पहले वो bye के साथ take care भी बोलने लगती है। सुबह breakfast के लिए उठाने लगती है। पेपर में पहले से ही नोट्स की एक फोटोकॉपी बना के रखती है। ये सभी प्यार/फ्रेंडशिप जैसी चीज के symptom हुआ करते थे, हुआ करते हैं। प्यार लड़के की तरफ से और फ्रेंडशिप लड़की कि तरफ से।”
― Terms and Conditions Apply
― Terms and Conditions Apply
“हिंदुस्तान के कई छोटे बड़े शहरों में माँ का सबसे बड़ा सपना यही होता है कि उसके बच्चे आपस में हमेशा फर्राटेदार इंग्लिश में बात करें खासकर के पड़ोस वाली आंटी जी के घर आने पर”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
“मेरे साथ के कई लड़के तो पूरे कॉलेज में फलानी बंदी से इसीलिए बात शुरू भी नहीं कर पाये क्यूंकी वो बंदी केवल अँग्रेजी में बात करती थी। हालांकि जो भी लड़के इंग्लिश नहीं बोल पाते थे और उस बंदी से बात करना चाहते थे वे हमेशा कहते रहे
“प्यार की कोई भाषा नहीं होती है”
― मसाला चाय
“प्यार की कोई भाषा नहीं होती है”
― मसाला चाय
“शहरों में जितनी तेज़ी से रोज़ एक नए Spoken English Class का बोर्ड बढ़ते जा रहा हैं उसी से पता चल जाता है कि हमारे स्कूल/कॉलेज अपना काम कितना सही से कर रहे है और उससे भी ज़्यादा ये पता चलता है कि अँग्रेजी में बोलने को लेकर हम वाकई एक serious देश हैं”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
Contemporary Hindi Fiction- Non Fiction
— 38 members
— last activity May 04, 2023 11:36AM
इस ग्रुप में हम उन हिंदी किताबों का ज़िक्र और चर्चा करेंगे जिनका प्रकाशन 21वीं सदी में हुआ। यानी जो किताबें साल 2000 या उसके बाद के वर्षों में कभी प्रक ...more





































