Divya Dubey > Divya's Quotes

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  • #1
    Divya Prakash Dubey
    “इंजीनियरिंग कॉलेज में लिखने वाले लोग अक्सर ही कम होते हैं, इसलिए जो थोड़े बहुत लिखने वाले होते हैं उनकी कैमिस्ट्री तुरंत मैच कर जाती है। बातें कब किताबों से शुरू होती थी और उनके characters पर खतम। वो जो एक दूसरे से सीधे नहीं बोल पाते थे। किसी किताब में कोई-न-कोई character वो बात बोल देता था। दोनों को कई बार एक दूसरे जो बोलना होता था वो किताब में निशान लगा कर बता दिया करते थे.”
    Divya Prakash Dubey, Terms and Conditions Apply

  • #2
    Divya Prakash Dubey
    “इंजीनियरिंग कॉलेज में अगर कोई लड़का नोट्स बनाता है तो उसको सच्चा इंजीनियर नहीं बोला जा सकता। कभी-कभी लगता है अगर कॉलेज में लड़कियाँ ना होतीं तो कभी किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज में कोई नोट्स बन ही ना पाता। जैसा हर लड़की के साथ होता है, जैसे-जैसे वो करीब आती है उसकी टोका-टाकी बढ़ जाती है। एक दिन ऐसा भी आता है जब हॉस्टल जाने से पहले वो bye के साथ take care भी बोलने लगती है। सुबह breakfast के लिए उठाने लगती है। पेपर में पहले से ही नोट्स की एक फोटोकॉपी बना के रखती है। ये सभी प्यार/फ्रेंडशिप जैसी चीज के symptom हुआ करते थे, हुआ करते हैं। प्यार लड़के की तरफ से और फ्रेंडशिप लड़की कि तरफ से।”
    Divya Prakash Dubey, Terms and Conditions Apply

  • #3
    Divya Prakash Dubey
    “हिंदुस्तान के कई छोटे बड़े शहरों में माँ का सबसे बड़ा सपना यही होता है कि उसके बच्चे आपस में हमेशा फर्राटेदार इंग्लिश में बात करें खासकर के पड़ोस वाली आंटी जी के घर आने पर”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #4
    Divya Prakash Dubey
    “मेरे साथ के कई लड़के तो पूरे कॉलेज में फलानी बंदी से इसीलिए बात शुरू भी नहीं कर पाये क्यूंकी वो बंदी केवल अँग्रेजी में बात करती थी। हालांकि जो भी लड़के इंग्लिश नहीं बोल पाते थे और उस बंदी से बात करना चाहते थे वे हमेशा कहते रहे
    “प्यार की कोई भाषा नहीं होती है”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #5
    Divya Prakash Dubey
    “शहरों में जितनी तेज़ी से रोज़ एक नए Spoken English Class का बोर्ड बढ़ते जा रहा हैं उसी से पता चल जाता है कि हमारे स्कूल/कॉलेज अपना काम कितना सही से कर रहे है और उससे भी ज़्यादा ये पता चलता है कि अँग्रेजी में बोलने को लेकर हम वाकई एक serious देश हैं”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #6
    Divya Prakash Dubey
    “जैसा कि अमूमन सुना जाता रहा है कि प्यार आपको शक्ति देता है उसका मतलब केवल इतना होता है कि प्यार आपको शक्ति तभी दे सकता है जबकि आपके पास पहले से शक्ति हो।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #7
    Divya Prakash Dubey
    “किसी लड़के ने किसी लड़की को अपना सबकुछ मान लिया है ये इतना गुपचुप तरह से होता कि कई बार लड़की को पता ही नहीं चल पता कि कोई उसको इतना प्यार करता है कि पहलवान भाई की टपरी पर बैठने वाला कोई भी लड़का अब उसको प्यार नहीं कर सकता”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #8
    Divya Prakash Dubey
    “। प्यार के बाद वही लोग बहुत possessive होते हैं जो प्यार होने से पहले भी possessive रहते हैं ।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #9
    Divya Prakash Dubey
    “कोई लड़का प्यार में कितना सफल है इसका अंदाज़ा इस बात से लगता कि वो किसी बंदी के साथ सामने वाले कैफ़ कॉफी डे में कभी बैठा है या नहीं । लड़की का सामने वाले कैफ़ कॉफी डे में बैठकर कॉफी पीने के लिए हाँ कर देने को प्यार की पहली सीढ़ी पार कर लेना माना जाता था”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #10
    Divya Prakash Dubey
    “इंग्लिश का टशन अलग ही है ये तो कानपुर शहर के बहुत से parents और अपने पहलवान भाई दोनों ही मानते हैं”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #11
    Divya Prakash Dubey
    “वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी और जैसा की अमूमन होता है जब भी कोई लड़की हँसती है तो वो कभी अकेली नहीं होती उसकी आस-पास वाली 2-3 सहेलियाँ भी तुरंत हँसने लगती है । बात चाहे उन्हे पता हो या न हो लेकिन लड़कियों की ये साथ हँसने वाली chemistry कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कॉमन है ।”
    Divya Prakash Dubey

  • #12
    Divya Prakash Dubey
    “चिट्ठी भेजूँगी न तुम्हें , बताओगे नहीं मिश्रा जी “
    जैसे ही उसने मिश्रा जी बोला ऐसा लगा मम्मी पापा से किसी चीज की जिद कर रही हो । मम्मी को जब भी अपनी कोई चीज मनवानी होती है पापा से तो वो उनको मिश्रा जी ही बोलती हैं ।”
    Divya Prakash Dubey

  • #13
    Divya Prakash Dubey
    “वहाँ पे इतने लोग एक दूसरे में गुम थे कि ऐसा लग रहा था कि पूरी दुनिया में दो लोग ही काफी हैं दुनिया चलाने के लिए । पहली बार शाम को डूबते सूरज से भी ज़्यादा सुंदर कुछ देखा था मैंने उन सारे लड़के लड़कियों में जो रोज़ एक दूसरे का हाथ थामकर दुनिया को बिखरने से बचा लेते हैं”
    Divya Prakash Dubey

  • #14
    Divya Prakash Dubey
    “प्लेसमेंट और प्राइवेट कॉलेज में कोई सीधा संबन्ध नही होता . प्राइवेट कॉलेज से इंजीन्यरिंग पढ़ना एक चीज़ है और प्लेसमेंट हो जाना बड़ी चीज़”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #15
    Divya Prakash Dubey
    “इंजीन्यरिंग के तीन साल पूरे होते होते सबको अपनी औकात समझ में आने लगती है । कई लोगों को समझ में आ चुका होता है कि इंजीन्यरिंग उनके लिए नहीं थी”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #16
    Divya Prakash Dubey
    “जो भी इंजीनियर एक दिन से ज़्यादा पढ़कर इम्तिहान दे वो इंजीनियर ही नकली है । जिसने भी अपने नोट्स बना के पढ़ाई की वो इंजीनियर भी नकली । लोग फालतू में ही doctors की हैंड-राइटिंग को कोसते रहते हैं । जिस इंजीनियर को सुबह का अपना लिखा हुआ शाम को समझ में आ जाए वो इंजीनियर भी नकली । इंजीन्यरिंग की असल बात यही है कि कॉलेज की लड़कियों के बनाए हुए नोट्स को एक रात में पढ़ लेना अगले दिन इम्तिहान में जाके उल्टी कर आना और एक दिन में जो भी पढ़ा था उसको इम्तिहान के 3 घंटे में लिखने के तुरंत बाद भूल जाना । अगर इससे ज्यादा टाइम तक आपको अपना पढ़ा हुआ याद रहता है तो बंदा हिंदुस्तान के किसी भी कोर्स के लिए तो फिट हो सकते हैं लेकिन इंजीन्यरिंग आपके लिए नहीं है”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #17
    Divya Prakash Dubey
    “IIT वालों का ऐसे तो दुनिया भर में तमाम चीजें बनाने को लेकर बड़ा नाम है लेकिन हिंदुस्तान में IIT में पढ़ने वाले वाले लड़के मुहल्ले भर के लड़के-लड़कियों को कभी motivate करने तो कभी जलील करने के काम भी आते हैं। motivate ऐसे ही कि “फलाने भईया को देखो IIT से पढ़ें हैं और अब अमरीका में dollar में लाखों कमाते हैं , तुम भी मेहनत करो और भईया जैसे बनो” और जलील ऐसे कि “मिश्रा जी के लड़के का फिर नहीं हुआ IIT में, दो साल से कोचिंग कर रहा था , कमजोर है पढ़ने में”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #18
    Divya Prakash Dubey
    “हिंदुस्तान में कभी कोई प्राइवेट इंजीन्यरिंग कॉलेज में पढ़ने के लिए कोचिंग नहीं करता।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #19
    Divya Prakash Dubey
    “प्राइवेट कॉलेज जहां प्लेसमेंट के अलावा बाकी सबकुछ किसी भी अच्छे इंजीन्यरिंग कॉलेज जैसा होता है । दोस्ती छोड़कर एक भी अच्छी चीज़ न सिखाने वाले दोस्त , जिन्दगी भर साथ न छोड़ने वाले दोस्त, हॉस्टल की मैस जहां खाने की वजह बस एक होती है कि जितनी देर तक मैस खुलती है उतनी देर लड़के लड़कियों को और लड़कियां लड़कों को बेरोकटोक तड़ सकें , कॉलेज के बाहर पास वाली टपरी जहां चाय, सिगरेट और मैगी मिलती है , जिन्दगी भर याद आने वाली वो एक लड़की या बहुत सी लड़कियां।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #20
    Divya Prakash Dubey
    “प्राइवेट कॉलेज जहाँ बंदा कभी चुपके से तो कभी घर वालों के प्रैशर की वजह से अपने फ़र्स्ट इयर में भी IIT-JEE का पेपर देता है और 5 point someone पढ़ते हुए ये सोचता है कि IIT में तो हुआ नहीं , जिंदगी में कभी वो no one से someone की दूरी तय भी कर पाएगा या नहीं ?”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #21
    Divya Prakash Dubey
    “कॉलेज के बाद भी कई लोग केवल इसलिए याद रह जाते हैं कि क्यूंकी उनको पूरे इंजीन्यरिंग के दौरान अपने कभी अकेले नहीं देखा होता वो हमेशा जोड़े में ही दिखते हैं”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #22
    Divya Prakash Dubey
    “शुरू में दोस्ती से बेस्ट फ्रेंड तक और शुरू होने के थोड़े दिन बाद से बेस्ट फ्रेंड से प्यार की दूरी तय करते हैं और जब एक बार प्यार की मोहर लग जाती है तो प्यार से और सच्चे वाले प्यार की दूरी तय करते रहते हैं । प्यार तक की दूरी तो कई जोड़े तय कर लेते हैं लेकिन ये सच्चे प्यार वाला लेवेल आते आते फ़ाइनल इयर आ जाता है इसीलिए इंजीन्यरिंग में प्यार करना एक बात है और सच्चा प्यार करना दूसरी बात।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #23
    Divya Prakash Dubey
    “कैंटीन में दो हिस्से हैं एक तरफ जहां लड़कों वाला पूरा ग्रुप रहता है और दूसरी तरफ वाले हिस्से में अच्छा सा कोना देखकर वो couple बैठते होते हैं जो प्यार के दूसरे लेवेल पर होते हैं यानि बेस्ट फ्रेंड से प्यार वाले लेवेल पर। कैंटीन के इस हिस्से को लोग प्यार से family section बोलते हैं”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #24
    Divya Prakash Dubey
    “वो प्यार के कारण अच्छी दोस्त खोना नहीं चाहता था। जब भी ये choice हो कि दोस्ती और प्यार में से एक चीज बचानी हो तो लड़के अक्सर दोस्ती को बचा लेते हैं क्यूंकी प्यार के चक्कर में दोस्ती भी नहीं बचती कई बार। तरुण ने भी यही किया उस शाम उसने शिवानी के प्यार और दोस्ती के बीच में दोस्ती को बचाना ठीक समझा।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #25
    Divya Prakash Dubey
    “ये जो and please be honest हैं न ये बार बार इसलिए बोला जाता है ताकि गलती से अगर बंदा बातों में आकार भूल गया है कि उसको सब सच बोलना है तो वो एक बार सोच ले और वही बोले जो इंटरव्यू crack करने के लिए ठीक हो । वरना ज़्यादा honest होने के जो भी फ़ायदे नुकसान हैं वो किसी से दुनिया में छुपे थोड़े हैं।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #26
    Divya Prakash Dubey
    “इंजीन्यरिंग में या इंजीन्यरिंग के बाद पहली नौकरी के इंटरव्यू का रिज़ल्ट देखकर पहली बार बंदे को समझ में आ जाता है please be honest का ये मतलब नहीं है कि झूठ नहीं बोलना है बल्कि केवल वो सच बोलने हैं जो नौकरी दिलवाने के लिए काफी है। हमारे अपने सच ,दुनिया में चलने वाले सच और इंटरव्यू में बोले जाने वाले सच में कई बार थोड़ा तो कई बार बहुत फ़र्क होता है।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #27
    Divya Prakash Dubey
    “इंजीन्यरिंग कॉलेज की ज़्यादातर love stories ऐसे ही किसी शाम सूरज के साथ ऐसे ही किसी कैंटीन के बाहर चुप चाप डूब जाती हैं। इंजीन्यरिंग के आखिरी महीने में सूरज पर love stories को साथ लेकर डूबने का लोड बढ़ता जा रहा था और वो गुस्से में रोज़ थोड़ा ज़्यादा लाल होता जा रहा था।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #28
    Divya Prakash Dubey
    “वैसे अगर देखा जाए कि IIT, NIT और प्राइवेट इंजीन्यरिंग कॉलेज में सबसे बड़ा फर्क क्या है तो वो फ़र्क होगा walk-in का । बड़े कॉलेज में कैम्पस में ही सब की नौकरी लग जाती है तो वो लोग कभी समझ नहीं पाते है असली लड़ाई असल में कैम्पस से बाहर निकलने के बाद शुरू होती है।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #29
    Divya Prakash Dubey
    “कम लोग और छोटी कंपनियाँ अक्सर वो कर दिखाते हैं जो हजारों समझदार लोगों की भीड़ नहीं कर पाती”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #30
    Divya Prakash Dubey
    “इसके बाद न जाने कितनी ही बार तरुण और नितिन ने साथ में दारू पी लेकिन वो नौकरी लगने वाली दारू की उस बोतल के पैसे आज भी तरुण पर उधार हैं। 10 सालों में वक़्त लंबी दूरी तय कर चुका है । तरुण अब Mr.T.K.Purohit हो चुका है। शिवानी खो चुकी है । नितिन की दोस्ती हर बीतते साल के साथ कितनी बढ़ चुकी है है ये लिखा नहीं जा सकता”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय



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