राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan] Quotes

Rate this book
Clear rating
राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan] राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan] by राही मासूम रज़ा
2 ratings, 3.50 average rating, 1 review
राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan] Quotes Showing 1-6 of 6
“वह सन्नाटा चम्मच भर चीनी बन गया और मेरी चाय मीठी हो गयी।”
Rahi Masoom Raza, राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“और क्या इस दुनिया में कुछ भी हो सकता है ...... अगर मुसलमान अपना घर जलवाने और अपने आपको क़त्ल करवाने के लिए दंगे शुरू कर सकते हैं, तो वह सरकारी नौकरी क्यों नहीं कर सकता।”
Rahi Masoom Raza, राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“अब उस उल्लू की दुम फ़ाख्ता को यह कैसे समझाता कि अरे भैया, जीना है तो किसी न किसी धर्म और किसी न किसी जाति की अंगुली पकड़ ले! निधर्मा मारा गया तो किसी पत्र - पत्रिका में खबर भी नहीं छपेगी !”
Rahi Masoom Raza, राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“नींद तो सपने की रोटी हैं न!”
Rahi Masoom Raza, राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“बात यह है कि तब वह जवान था। आँखें मजबूत थीं। सपने देख सकती थी , तो उसने अपनी आँखों को कोई और काम सिखलाया ही नहीं और फिर ऐसा हुआ कि सपनो का बाज़ार मंदा हो गया जिंदगी बाजार का उतार चढाव होकर रह गई।”
Rahi Masoom Raza, राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
“हमारी फिल्मों में तो बराबर यही होता है। गाल पर एक मस्सा लगा लो तो कोई नहीं पहचानता।अगर वाकई ऐसा हो जाये तो कैसा मजा आये ! मालिक मकान किराया मांगने आये और हम गाल पर मस्सा जड़ के उसके सामने मुस्कुराते निकल गए। अब तमाम लोग अपने बिल के लिए हमें खोज रहे हैं और हम हैं कि गाल पर एक मस्सा चिपटाये मस्ती छांट रहे हैं, पर जीवन में मस्सें का यह महत्त्व नहीं है यह सोचकर हम उदास हो गए।”
Rahi Masoom Raza, राही मासूम रज़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ [Raahi Masoom Raza Ki Shreshth Kahaniyan]
tags: humor