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शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi] Quotes

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शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi] शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi] by Munshi Premchand
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शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi] Quotes Showing 1-3 of 3
“मुहरा आप कयामत तक न छोड़ें, तो क्या चाल ही न होगी? फ़रज़ी पिटते देखा तो धाँधली करने लगे।”
― Munshi Premchand, शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi]
“यहाँ तक कि मिर्ज़ा की बेगम साहिबा को इससे इतना द्वेष था कि अवसर खोज-खोजकर पति को लताड़ती थीं। पर उन्हें इसका अवसर मुश्किल से मिलता था। वह सोती ही रहती थीं, तब तक उधर बाज़ी बिछ जाती थी। और”
― Munshi Premchand, शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi]
“अपने बादशाह के लिए उनकी आँखों से एक बूँद आँसू न निकला, उन्होंने शतरंज के वज़ीर की रक्षा में प्राण दे दिए।”
― Munshi Premchand, शतरंज के खिलाड़ी [Shatranj ke Khiladi]