The Heartfulness Way Quotes
The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
by
Kamlesh D. Patel1,437 ratings, 4.33 average rating, 202 reviews
The Heartfulness Way Quotes
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“A book may give us wisdom, but it cannot make us wise. A book can give us knowledge, but it cannot make us experience the truth of that knowledge.”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
“However, if you suffer from insomnia, that is also the cure. Lie in bed and start meditating. You’ll fall asleep straight away!”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
“Duality is intrinsic to prayer. In prayer, there are always two: a person in need and the personality whose help is needed.”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
“एक गुरु के अन्दर कभी यह विचार नहीं आता कि वह गुरु है। अगर उसके हृदय में यह भावना एक बार भी प्रवेश कर गयी तो मेरे विचार से वह इस कार्य के लिए उसी क्षण अयोग्य हो जाता है। वास्तव में एक गुरु को स्वयं को नौकर से भी कम समझना चाहिए। लेकिन इसकी बजाय हमें अक्सर कई सारे स्वयम्भू गुरु देखने को मिल जाते हैं। आपको पता है, मैंने कभी चारी जी को स्वयं को बाबूजी के शिष्य के अलावा और कुछ कहते नहीं सुना। और बाबूजी... वे तो इतने विनम्र थे कि “मैं” शब्द से वह भ्रमित हो जाते थे।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“जिज्ञासु की सच्ची तड़प मालिक को उसके दरवाज़े पर ले आती है। कुछ मामलों में जिज्ञासु इस आन्तरिक पुकार के प्रति जागरूक होता है। कुछ अन्य मामलों में यह पुकार अचेतन होती है। और जिस प्रकार यह सत्य है कि साधक या जिज्ञासु गुरु को खींच लेता है, यह भी उतना ही सत्य है कि गुरु जिज्ञासु का चयन करता है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“अगर आपका हृदय तैयार है तो फिर आपको गुरु से बार-बार मिलने की ज़रूरत ही क्या है? गुरु बहुत दूर से कार्य कर सकता है। यह सही है कि वह वाकई कुछ नहीं करता लेकिन कार्य उसी के ज़रिये होता है। और उस कार्य के होने के लिए आपको गुरु की भौतिक मौजूदगी में होना ज़रूरी नहीं है। यह एक ऐसी सीमा है जिसे हम अपने मन में बना लेते हैं। गुरु को आपका नाम जानने की ज़रूरत नहीं है। वह आपको चेहरे से पहचाने, यह भी ज़रूरी नहीं है। इस तरह का सचेतन ज्ञान उसके कार्यों के लिए पूरी तरह अनावश्यक है। गुरु को इस बारे में भी जानने की ज़रूरत नहीं है कि वह आप पर कार्य कर रहा है, क्योंकि आध्यात्मिक कार्य गुरु के हृदय से स्वतः होते हैं। आपके हृदय ने पुकार लगायी है तो गुरु के रूप में प्रकृति उत्तर देती है। इस प्रकार, गुरु-शिष्य का सम्बन्ध आन्तरिक होता है जो गुप्त रूप से हृदय में फलता है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“हम गुरु की उपस्थिति के कारण साफ़ होते हैं। उसकी उपस्थिति के कारण ही हम प्राणाहुति प्राप्त करते हैं। गुरु कुछ भी नहीं करता है। लेकिन वह जैसा है, वैसा बनने के लिए उसने ख़ुद पर बहुत मेहनत की ठीक उसी तरह जैसे हमें भी अपने ऊपर मेहनत करनी है। हमें अभ्यास करना होता है! अभ्यास के ज़रिये हम अपने हृदय को तैयार करते हैं जिससे कि वह गुरु से सब कुछ खींच सके। इसीलिए हम प्रतिदिन ध्यान, सफ़ाई और प्रार्थना करते हैं। हमारे प्रयास के बिना हमारे जीवन में गुरु की मौजूदगी व्यर्थ चली जाती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“वाकई, गुरु कुछ नहीं करता। और न ही उसे कुछ करना है। क्या सूर्य की मौजूदगी में रात हो सकती है? सूर्य उदय होता है, और अँधकार चला जाता है। इसके लिए सूर्य कुछ नहीं करता। उसका स्वभाव ही यह है। गुरु भी ठीक इसी प्रकार होता है। गुरु का शाब्दिक अर्थ है ‘अँधकार को दूर करने वाला’। लेकिन सूर्य की ही तरह वह भी अँधकार को दूर करने के लिए कुछ नहीं करता। वह तो जैसा है, वैसा है।” “कली पर जैसे ही सूर्य की किरणें पड़ती हैं, वह धीरे-धीरे खिलने लगती है। क्या सूर्य को इसके लिए कुछ करना पड़ता है? क्या कली को कुछ करना पड़ता है? यह तो बस हो जाता है।” “इसलिए गुरु ख़ुद कुछ नहीं करता। यह तो उसकी मौजूदगी है जो सब कुछ करती है। और उसकी मौजूदगी तभी कार्य करती है जब जिज्ञासु का हृदय पुष्पित होने के लिए तैयार हो। कली को जबरन खोलने का प्रयास उसे बर्बाद ही करेगा। अगर गुरु को हम पर कार्य करना पड़े तो वह एक थोपी हुई चीज़ होगी। यह विध्वंसकारी होगा। इसलिए गुरु ऐसा नहीं करेगा।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“एक खुला हृदय सूर्य के सामान है जो हरेक के लिए चमकता है। यह अपना प्रेम उत्सर्जित करने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता। खुले हृदय से प्रेम बिना किसी भेद-भाव के बहता है। लेकिन हम सचमुच यह नहीं कह सकते कि हृदय प्रेम करता है। बल्कि एक खुला हृदय स्वयं ही प्रेम है और जो कोई इसकी किरणों में आकर खड़ा होता है वह महसूस करता है कि उसे प्रेम मिल रहा है। और बन्द हृदय क्या है? यह उस व्यक्ति के समान है जिसने स्वयं को पूरे दिन अन्दर बन्द रखा।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“यदि आपके अन्दर आस्था है तो फिर अपनी परेशानियों के बारे में ईश्वर को याद दिलाने की ज़रूरत ही क्या है? और अगर आपमें आस्था नहीं है तो फिर प्रार्थना करने की ज़रूरत ही क्या है?”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“जब आपका हृदय अनन्त रूप से खुल जाता है, जिसमें कोई दरवाज़ा या दीवार नहीं होती तो प्रेम सम्पूर्ण अनन्त ब्रह्माण्ड में बहने लगता है। तब आप महसूस करने लगते हैं कि समस्त ब्रह्माण्ड आपका है और आप भी इस ब्रह्माण्ड के हैं। हर समय ‘मैं’ के बारे में सोचने की जगह अब आप ‘हम’ के बारे में सोचने लगते हैं।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“जहाँ प्रेम होता है, वहाँ कर्तव्य का विचार गायब हो जाता है, काम करने का विचार गायब हो जाता है। प्रेम में हम अपना कर्तव्य बिलकुल प्राकृतिक तरीके से करते हैं। बिना किसी बोझ के। बिना प्रेम के कर्तव्य निभाना हमें गुलाम बनाता है जबकि प्रेम हमें स्वतन्त्रता देता है। यही प्रयास रहित कर्म का रहस्य है। यह केवल प्रार्थना का ही नहीं बल्कि हमारे हर कार्य का आधार है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“पूर्णता केवल देने से ही आती है और देने के लिए सबसे वास्तविक उपहार है ख़ुद को देना। इसलिए ‘ख़ुद’ को दें।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“अगर आप दिव्य वर्षा चाहते हैं तो आपको अपने हृदय में कम दबाव पैदा करना होगा। मतलब आपका हृदय खाली होना चाहिए। उपहार, आशीर्वाद या गुण प्राप्त करने की इच्छाओं से रहित। तभी आन्तरिक खालीपन पैदा होगा। और यह स्वतः ही दिव्य वर्षा को अपनी ओर आकर्षित कर लेगा। जब आपका हृदय पूरी तरह से खाली हो जायेगा तो ईश्वर वहाँ रहने आ जायेगा। इसकी वह उपेक्षा नहीं कर सकता।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“मये वहदत के तालिब, दिल भी कर बहरे तलब खाली।
तही पैमाने पर महफ़िल में सिर झुकता है बोतल का।। ‘ओ दिव्य मदहोशी के प्यासे! इसे पाने के लिए अपने हृदय को खाली कर दे क्योंकि खाली प्याले पर ही एक भरी हुई शराब की बोतल झुकती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
तही पैमाने पर महफ़िल में सिर झुकता है बोतल का।। ‘ओ दिव्य मदहोशी के प्यासे! इसे पाने के लिए अपने हृदय को खाली कर दे क्योंकि खाली प्याले पर ही एक भरी हुई शराब की बोतल झुकती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
“अगर आप दाता को चाहते हैं तो उपहारों को भूल जाइए, आशीर्वाद को भूल जाइए, आध्यात्मिक उपलब्धियों को भूल जाइए। वे अपने तरीके से आयेंगे। पहले से ही उनका विचार अपने अन्दर मत लाइए। जब वही आपके हृदय में बैठा हुआ है तो फिर आपको और क्या चाहिए? इसीलिए कुछ लोग केवल उसी के लिए प्रार्थना करते हैं।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“ईश्वर के सच्चे प्रेमी के कोई छिपे इरादे नहीं होते। उसे किसी स्वर्ग या नर्क की परवाह नहीं होती और न ही किसी आशीर्वाद या आध्यात्मिक प्रगति की। वह प्रेम में ही सन्तुष्ट रहता है। जब देने वाला ही आपके पास हो तो उससे कुछ माँगना क्यों? केवल प्रेम से ही यह सम्भव हो सकता है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“घुटनों के बल झुक कर आशीर्वाद और फायदे की माँग करना बेवकूफ़ी है। स्वार्थपूर्ति के लिए प्रार्थना करना ठीक वैसा ही है जैसे पैसों के लिये विवाह करना। इससे सम्बन्धों का स्तर गिर जाता है। इससे कोई फ़र्क नही पड़ता कि हमारी माँग भौतिक है या आध्यात्मिक। दोनों ही हृदय के शिष्टाचार के विरुद्ध हैं।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“सफ़ाई • दिन भर एकत्र हुई छापों को बाहर निकालने के इरादे से सुविधाजनक आसन में बैठें। • अपनी आँखें बन्द करें। कल्पना करें कि सभी जटिलताएँ और अशुद्धियाँ आपके पूरे तन्त्र से बाहर निकल रही हैं। • आपकी टेलबोन से लेकर सिर के ऊपरी भाग तक के क्षेत्र से, आपके पीछे की तरफ़ से, ये बाहर की ओर बह रही हैं। • महसूस करें कि ये धुएँ या वाष्प के रूप में आपसे बाहर निकल रही हैं। • सतर्क रहें। धीमे से, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ, प्रक्रिया को तेज करें, आवश्यकतानुसार इच्छाशक्ति का प्रयोग करें। यदि आपका ध्यान भटकता है और अन्य विचार मन में आते हैं तो धीमे से फिर से सफ़ाई पर केन्द्रित हो जायें। • इस प्रक्रिया को लगभग बीस से तीस मिनट तक जारी रखें। जब आप अपने हृदय में सूक्ष्म हल्कापन महसूस करने लगें तो समझ लें कि सफ़ाई पूर्ण हो चुकी है। • अब कल्पना करें कि स्रोत से पवित्रता की एक धारा आपके तन्त्र में सामने से प्रवेश कर रही है। यह आपके पूरे तन्त्र में बह रही है और शेष बची जटिलताओं और अशुद्धियों को बाहर ले जा रही है। • इसे एक या दो मिनट तक जारी रखें। • अब आप एक सरल, शुद्ध और सन्तुलित अवस्था में आ चुके हैं। आपके शरीर की प्रत्येक कोशिका सरलता, हल्कापन और पवित्रता उत्सर्जित कर रही है। इस दृढ़विश्वास के साथ इसे समाप्त करें कि सफ़ाई की प्रक्रिया प्रभावी तरीके से पूर्ण हो चुकी है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“जब तक किसी परिस्थिति से प्रभावित होने के लिए आप पहले से ही संवेदनशील न हों तब तक वो परिस्थिति आपको प्रभावित नहीं कर सकती।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“हम ध्यान में क्या करते हैं? हम भीतर जाते हैं। हम अपने अस्तित्व के केन्द्र की ओर बढ़ते हैं। गहरे ध्यान में हम अपने स्रोत के सम्पर्क में आ जाते हैं। इसमें विलय होकर, इसमें मिलकर और इसमें डूबकर हम इसके साथ एक हो जाते हैं। यह मिलन योग की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। यह उस स्रोत की ओर वापसी है जहाँ से हमारी उत्पत्ति हुई है। इस प्रकार देखें तो योग विलय के सिद्धान्त का प्रतिनिधित्व करता है। यह हमारी सृष्टि के सृजन से पहले के क्षण में वापसी है। तब सब कुछ एक में समाया हुआ था। उस ‘एक’ में कोई हलचल नहीं थी। इसी कारण योग की स्थिति पूर्ण शान्ति और आन्तरिक स्थिरता की स्थिति होती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“दृष्टि के माध्यम से, शब्द के माध्यम से, स्पर्श के माध्यम से जो दिव्यता को शिष्य में प्रविष्ट कर सकता हो और उसे जागृत कर सकता हो वही वास्तव में असली गुरु है,”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“प्राणाहुति के कारण, इस प्रेमपूर्ण, शक्तिहीन शक्ति के कारण हम स्रोत के साथ अपने ऐक्य की मूल अवस्था फिर से हासिल कर पाते हैं और यही योग की असल परिभाषा भी है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“असल में ‘आदि शक्ति’ से भी बेहतर एक शब्द ‘शक्तिहीन शक्ति’ होगा।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“समाधि के गहनतम स्तरों पर, हमारी स्थिति उस मूल अवस्था से मेल खाती है जो कि हमारे अस्तित्व में आने के पूर्व थी। उस समय कोई हरकत नहीं थी, केवल स्थिरता थी। लेकिन उस स्थिरता में असीम क्षमता थी। असीम ऊर्जा थी। जब उस ऊर्जा को गति प्रदान कर दी जाती है तो हम इसे मूल शक्ति या आदि शक्ति कहते हैं। यौगिक प्राणाहुति वही मूल शक्ति या आदि शक्ति है। केवल मूल शक्ति ही हमें मूल स्थिति में ला सकती है।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“आध्यात्मिक यात्रा की अवस्थाएँ जिज्ञासु के लिए बेहद आकर्षक हो सकती हैं। क्योंकि वे अत्यन्त उल्लास, शान्ति और आनन्द से परिपूर्ण होती हैं। असल में वे इतनी मोहक होती हैं कि हम वहीं ठहर जाने और आध्यात्मिक यात्रा का पूर्णतः त्याग करने के लिए प्रलोभित हो जाते हैं।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“प्राण एक आवश्यक मौलिक जीवन शक्ति है, हम यह भी समझ जाते हैं कि प्राणाहुति उसी पवित्र सार तत्व की भेंट है।” “यह भेंट किसे दी जाती है? यह हमें दी जाती है। परम् स्रोत हम सब के लिए स्वयं को भेंट करता है। इस बात से हमें ईसाई धर्म की याद आती है, जहाँ ईश्वर सभी की खातिर अपना बलिदान करता है और स्वयं की भेंट दे देता है। इसलिए प्राणाहुति को हम एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में समझ सकते हैं जिसमें ईश्वर अपने ही सार से हमें सराबोर करता”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“भक्ति कैसी? आपने कुछ अनुभव ही नहीं किया। आप दिव्य को वास्तव में जान ही नहीं पाये। अभ्यास के बिना भक्ति अपने उद्देश्य से अलग रहती है। यह बाह्य हो जाती है। जैसे ही हम भगवान के बारे में सोचते हैं हमारी कल्पनाएँ काम करना शुरू कर देती हैं। शायद हम दिव्य सिंहासन पर बैठे एक यशस्वी अस्तित्व की कल्पना करते हैं। या फिर हम शक्ति और ऊर्जा के एक निराकार स्रोत के बारे में सोचते हैं। ईश्वर है लेकिन जब तक हम भीतर नहीं जाते और उसकी उपस्थिति महसूस नहीं करते, तब तक ईश्वर एक अवधारणा ही रह जाता है—एक मानसिक जोड़-तोड़।”
― The Heartfulness Way (Hindi)
― The Heartfulness Way (Hindi)
“Through meditation, we move from the complexity of mind to the simplicity of heart.”
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
― The Heartfulness Way: Heart-Based Meditations for Spiritual Transformation
