समुद्र की लहरों में Quotes

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समुद्र की लहरों में समुद्र की लहरों में by Khushwant Singh
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“उसने किसी को कहते हुए सुना था कि किसी की भलाई करो तो समझ लो कि ज़िंदगी भर के लिए एक दुश्मन तैयार कर लिया। उसने तब इस बात को सच मानने से इनकार कर दिया था, लेकिन नायर की बदौलत उसे इस नज़रिये को सही मानना पड़ रहा था।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“तुम मर्द सिर्फ जल्दबाज़ी में छुक, छुक, फट करना जानते हो। इसे पूजा की तरह समझो तो तुम्हें इसमें इतनी तृप्ति मिलेगी जितनी करोड़ों रुपये कमाने से भी नहीं मिल सकती।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“समय निकालो। हर शाम बक-बक करने के बजाय रोज़ एक पन्ना लिखो और धीरे-धीरे अपनी पूरी बात काग़ज़ पर उतार दो।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“उसके विचार गांधीजी के विचारों से मेल नहीं खाते थे, लेकिन वह उन्हें एक ऐसे शख्स के रूप में देखता था जिसके लिए अपनी नियति देश की नियति से अलग नहीं”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“अगर आप सच्चाई में विश्वास रखते हैं तो आप ईश्वर पर भी विश्वास करते हैं। इससे ज़्यादा इस मुद्दे पर और कुछ नहीं कहा जा सकता।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“उसने उनके नज़दीक ऐसी हल्की और अपनेपन का भान कराने वाली महक का एहसास किया जैसी वह अपनी मां के आसपास पाता था। विक्टर ने देखा कि उसका निबंध गांधीजी के पास ही रखा है। ‘तुमने जो कुछ इसमें लिखा है वह मैंने पढ़ा। लगता है भारत के भविष्य को लेकर तुम मेरे विचारों से सहमत नहीं हो। तुम भारत पर पश्चिम का असर और यहां तरह-तरह की चीज़ों की भरमार देखना चाहते हो। तुम अपनी जगह ठीक भी हो सकते हो क्योंकि ज़्यादातर भारतीय अमीर होना, बड़े-बड़े घरों में रहना, कार रखना और बढ़िया कपड़े पहनना चाहते होंगे। मेरा मानना है कि ये सब हासिल किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करके लोग आपनी आत्मा और भारतीयता की अपनी पहचान से हाथ धो बैठेंगे।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“वेलेरी ने पूछ ही लिया–‘और यह कहां से मिला?’ वैसे ही अक्खड़पन से उसने जवाब दिया–‘अमेरिकी संविधान से।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“उसने गांधी की सभी बातों को ग़लत ठहराने की कोशिश की थी–हाथ की कताई का कपड़ा, आत्मनिर्भर गांव और बेसिक शिक्षा। विक्टर भारत की वह तसवीर देखना चाहता था जिसमें बड़ी-बड़ी कपड़ा मिल, स्टील के कारखाने, कार बनाने वाली फैक्टरी, बड़े-बड़े बांध और हज़ारों मील लंबी नहरें हों, हर गांव तक पक्की सड़क जाती हो, खूब सारे स्कूल, कॉलेज और अस्पताल हों। यानी दुनिया का सबसे संपन्न देश हो, जात-धर्म के झगड़े वग़ैरह न रहें। अपने निबंध का अंत उसने एक लैटिन वाक्य से किया–नोवस अॉरदो सेक्लोरम। यानी आने वाले युगों के लिए नयी व्यवस्था।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“विक्टर का निबंध आखिरकार तैयार हो ही गया। उसने शुरुआत ऐसे की–‘मैं देख रहा हूं, एक ऐसा महान राष्ट्र जो बैठे-बैठे सपने में डूबा, इंतज़ार कर रहा है एक ऐसे शब्द का जिसे सुनते ही वह फिर से जी उठेगा। ‘ये तुमने कहां से लिया?’ वेलेरी बॉटमली ने पूछा। ‘कोई एडवर्ड कारपेंटर हैं, उन्हीं के लेख से।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“फैसले को सही ठहराते हुए गांधी ने पोस्टकार्ड पर जवाब लिख भेजा। –‘हमें अंग्रेज़ों से जितना कुछ मिल सकता है ले लेना चाहिए ताकि ‘ उनसे बराबरी से लड़ा जा सके।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में
“उन्हें बेहद हैरत हुई जब गांधी ने अंग्रेज़ों के बनाए क़ानून में ही उन्हें पछाड़कर देश के आत्म-सम्मान को बढ़ाने के लिए उनकी तारीफ़ की। गांधी जी ने उनसे कहा था–मट्‌‌टू साहब, ये भी एक किस्म की आज़ादी की लड़ाई है। मट्टू की कामयाबी से जलने वालों का इलज़ाम था कि वह भारत विरोधी और अंग्रेज़ी दस्तूरों के ग़़ुलाम हैं। यह बात बोझ बनकर बरसों से उन्हें तकलीफ़ दे रही थी।”
Khushwant Singh, समुद्र की लहरों में