Upnishadon Ka Sandesh Quotes

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Upnishadon Ka Sandesh (Hindi Edition) Upnishadon Ka Sandesh by Sarvepalli Radhakrishnan
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“सत्य को जो जानते हैं वे सत्य बन जाते हैं, ‘ब्रह्मविद् ब्रह्मैव भवति’।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“प्रार्थना सत्य का अन्वेषण है, जिसके लिए चेतना के उत्थान द्वारा अंतःस्थित अज्ञात में प्रवेश करना होता है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“शारीरिकता बन्धन पैदा नहीं करती है, बल्कि मनोवृत्ति पैदा करती है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“जन्म ब्रह्म का ब्रह्माण्डीय सत्ता में एक रूपान्तर है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“हम जगत् में रहते और कार्य करते रहते हैं, पर हमारा दृष्टिकोण बदल जाता है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“आध्यात्मिक ज्ञान (विद्या) जगत् को नहीं मिटाता है, बल्कि उसके सम्बन्ध में हमारे अज्ञान (अविद्या) को मिटा देता है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“जब मन ध्यान की शक्ति से परमात्मा का रूप धारण कर लेता है, तो वह ‘संप्रज्ञात समाधि’ होती है, जिसमें जीव को यह ज्ञात होता है कि उसकी चेतना ने ब्रह्म का स्वरूप धारण कर लिया है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“ज्ञान हमें उस स्थिति पर ले जाता है जहाँ कामना शान्त हो जाती है,”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“क्या तुम यह सोचते हो कि मनुष्यों के दुष्कर्म ऊपर आकाश को उड़ते हैं, और तब कोई हाथ उनका लेखा-जोखा ईश्वर की पटि्टयों पर लिखता है, और ईश्वर, उन्हें पढ़-पढ़कर, संसार का न्याय करता है? नहीं, आकाश के गुम्बज में इतनी जगह नहीं है कि वहाँ पृथ्वी के अपराध लिखे जा सकें, और न ईश्वर के लिए स्वयं उनका दण्ड देना उपयोगी है, न्याय यहीं पृथ्वी पर होता है, पर तुम्हारे आँखें होनी चाहिए।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“अस्तित्व के ही नियम का प्रकाशन है।2 विश्व-व्यवस्था दिव्य मानस की प्रतिच्छाया है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“दिव्य मूलाधार में स्थित नहीं हो जाते, तब तक हम संसार के अनन्त घटना-क्रम से बँधे रहते हैं।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“जिसका अपनी इन्द्रियों पर नियन्त्रण है, जो आत्मा में आनन्द पाता है और जो ज्ञानप्राप्ति के लिए उत्सुक है, उसके लिए घर कारागार नहीं है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“नीत्शे कहते हैं : “बालक भोलापन है और विस्मृति है, एक नया आरम्भ है, एक खेल है, अपने-आप लुढ़कने वाला पहिया है, एक आदिम गति है, एक पवित्र ‘हाँ’ (स्वीकृति) है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“हेरेक्लिटस के अनुसार : “वह राज्य बालक का है”, “जब तक तुम बदलोगे नहीं और छोटे बालक नहीं बनोगे, तब तक उस स्वर्गीय राजय में प्रवेश नहीं पा सकोगे।”–जीसस।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“वह गरजा, ‘क्या छत पर भी कभी कोई ऊँट ढूँढ़ता है?’ वे बोले, ‘हम आपका ही अनुकरण कर रहे हैं, जो तख्त पर बैठकर अल्लाह को पाना चाहते हैं।’ 21”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“जब सभी कुछ शान्त मौन में था और रात्रि अपनी राह के मध्य में थी, तब ‘शब्द’ स्वर्ग से नीचे कूद पड़ा।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“साधुता की खेती मौन से होती है।” “मौन और आशा में ही तुम्हारी शक्ति होगी।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“आजन्ममरणान्तं च गंगादितटिनीस्थिता:। मण्डूकमत्स्यप्रमुखा: योगिनस्ते भवन्ति किम्?।।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“बालक का कुशल अज्ञान जीवन से जुड़ा होता है”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“दान श्रद्धा के साथ देना चाहिए, अश्रद्धा के साथ नहीं देना चाहिए। उदारता, विनम्रता, भय और सहानुभूति के साथ देना चाहिए।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“पूर्ण मनुष्य एक दिव्य बालक है,”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“एक प्रलोभन के प्रतिरोध से जो बल प्राप्त होता है, उससे हमें दूसरे प्रलोभन पर विजय पाने में सहायता मिलती है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“तप’ आध्यात्मिक लक्ष्यों के लिए अपनाया गया कठोर आत्मानुशासन है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“संयम, चारित्रिक शुद्धता, एकान्त और मौन आत्म-निग्रह के उपाय हैं।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“जो बिजली की गरज में सुने जाते हैं। वे इस प्रकार हैं : ‘दम’ अर्थात् आत्मनिग्रह, “दान’ और ‘दया’।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“देवों में इच्छाएं (काम) होती हैं, मनुष्य ‘लोभ’ से पीड़ित हैं और असुर ‘क्रोध’ से।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“जीवन की एक यज्ञ से तुलना की गई है जिसमें तप, दान, साधुता, अहिंसा और सत्यवादिता ही दक्षिणा है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“मन और हृदय को शुद्ध करने का उपाय ध्यान है। इसका अर्थ है विश्राम, मानसिक हलचल को रोकना, अन्तर के उस एकान्त में लौटना जहाँ आत्मा परमात्मा की फलदायी नीरवता में लीन हो जाती है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“जीवन को उसके बहाव पर बहने देते हैं और वह सागर की लहर की तरह उठता है और फूल की तरह खिलता है।”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh
“वैराग्य आसक्ति का विरोधी है, भोग का विरोधी नहीं है। विरक्ति की भावना से भोग करो,”
Sarvepalli Radhakrishnan, Upnishadon Ka Sandesh

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