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पंजा Quotes

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पंजा पंजा by Vandana Yadav
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पंजा Quotes Showing 1-18 of 18
“हमारा शरीर विज्ञान के फॉर्मूले से बना है मगर इसमें रहती हैं भावनाएं। हम जब किसी के लिए कुछ महसूस करना चाहें, तो कर लेना चाहिए। भावनाओं का विज्ञान कहता है कि उन्हें रोको मत, जिस रूप में वे आयें, आने दो। जिस गति से वे आयेंगी, उसी गति से चली जायेंगी। जो आराम से आयेगा, वह उतनी ही सहजता से जायेगा। जो तूफान की तरह आयेगा, सुनामी के बाद की तबाही छोड़कर जायेगा।”
― Vandana Yadav, पंजा
“इंसान अपनी परेशानियां बढ़ाकर सहज महसूस करता है। इन्हें परेशानियों में रहना, परेशानियों पर बात करना और परेशानियों के हल खोजने पर बात करना पसंद है। पर उन्हें परेशानियों को ख़त्म करना पसंद नहीं है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“नेताओं के निवास स्थान पर हर चुनाव से पहले बढ़िया वाला वास्तु विज्ञानी घर में तोड़फोड़ जरूर करवाता है। अगली जीत सुनिश्चित करने के लिए घर के राहू-केतु का इलाज करवाया जाता है। उसे यक़ीन हो गया है कि राजनीतिज्ञ, आधुनिक युग के राजे-रजवाड़े हैं। इनके घरों में ऐसे तामझाम नहीं होंगे तब और कहाँ होंगे।”
― Vandana Yadav, पंजा
“इंसान अपनी ताकत पर काम करने लगे तो असंभव को हरा दे पर ऐसा हो नहीं पाता। वो अपनी कमजोरियों में ही डूबा रहता है। जानवरों को इन्होंने अपनी पसंद के जैसा बना लिया है लेकिन ये खुद इंसान नहीं बन पाए।”
― Vandana Yadav, पंजा
“इंसान किसी ओर की गलती पर चुप रहने वाली कौम नहीं है। दूसरों की गलतियों को उछालने वाले लोग अगर किसी एक नाम पर चुप हो जाते हैं, तब समझ लेना चाहिए कि मामला कुछ और ही है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“अड़ियल घोड़े को चाबुक की नहीं, सही सवार की जरूरत होती है। घुड़सवारी के लिए सही घोड़े का चुनाव करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे ज्यादा महत्व बेहतर सवार बनने के बाद सवारी करने का है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“समझदारी और भावनाएं एक-दूसरे के धुर विरोधी तत्व हैं। दरअसल इंसान भावनाओ के पैरों पर चलता है। लेकिन जब उसे व्यवहारिक होकर निर्णय लेना होता है, वह सबसे पहले भावनाओ की बैसाखियों को उतार कर दूर फेंक देता है और इसके बाद समझदारी से निर्णय लेता है। समझदारी उसे सफल बनाती है और फिर वह 'सफल आदमी' जीवन भर अकेला रहने को बाध्य हो जाता है। एक समय के बाद जब सफलता का नशा उतरता है, तब वह सारी उम्र ऐसे रिश्तों के पीछे भटकता है जहाँ मन से जुड़ सके। यानी वह लौटता आख़िर में भावनाओ पर ही है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“किसी और पर भरोसा करना सबसे खतरनाक खेल है। दूसरे पर विश्वास करना, अपने खिलाफ साजिश करना होता है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“बंधु के हैंडलर और वैसे ही कई और सिपाहियों की शहादत से माहौल शोकग्रस्त हो गया था मगर यूनिट में बंदों की कमी नहीं होने दी गई। जब तक देश में फौजी हैं, एक के गिरते ही, दूसरा सैनिक उसकी जगह लेने के लिए पहुंच जाता है फिर अंजाम चाहे जो हो। जान जाये या बचे।”
― Vandana Yadav, पंजा
“जज साहब अपने विरुद्ध केस की सुनवाई जब स्वंय ही करेंगे तब थोड़ा-बहुत स्वार्थी हो जाना तो जायज है ना। इस पर भी जब पता लगे कि सामने वाली पार्टी के पास ना अपने बचाव के सही साधन है, ना अपने हक़ की सही-सही जानकारी और ना ही अपना वकील है, तब न्यायाधीश साहब को निर्णय देने में हिचकिचाहट भी नहीं होगी। यही कारण है कि इंसान और कुत्ते के बीच अगर क़ीमत लगाने की बात हो तब बाजी हमेशा इंसान जीतता है। दरअसल क़ीमत लगाने का अधिकार इंसान ने अपने पास सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में जिसकी क़ीमत कम है या बिल्कुल नहीं, कुर्बानी उसे ही देनी होती है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“अपने दस शव थे दूसरे पाँच। शवों पर खून जम चुका था। सबकी देह की महक अलग-अलग होते हुए भी एक जैसी लग रही थी। असल में मरने के बाद शरीर का व्यक्तिगत कुछ नहीं रहता। प्रत्येक देह की अपनी जो अलग तरह की गंध होती है, वह भी उसका साथ छोड़ देती है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“मरने वाला अपनी संपत्ती का हिस्सेदार नहीं होता। वह कुछ वर्षों के लिए दीवार पर तस्वीर टाँगने जितने स्थान का वारिस हो सकता है, बस। इतना स्थान भी यदि परिवार चाहे, तब मिलता है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“फौजी अपने आस-पास का माहौल अपने मुताबिक बनाना जानते हैं। उन्हें अनुशासन बनाए रखना आता है। अपनी पत्नी और बच्चों को बिना यूनिफार्म पहनाए और बिना तनख्वाह दिये, वह फौजियों की तरह व्यवहार करना सिखा देते हैं।”
― Vandana Yadav, पंजा
“सुख और दुख की सीमा पर आँसुओं का सैलाब बस्ता है।”
― Vandana Yadav, पंजा
“घर आये दोस्तों की नीयत जाँचने के लिए इंसान अपने कुत्ते पर भरोसा करता है। पल-पल में किरदार बदलने वाला लोग, अपनी बिरादरी की इमानदारी जाँचने के लिए जानवर पर भरोसा कर लेते हैं। अपने अपने पालतू की समझ पर जीवन भर के रिश्ते दाँव पर लगा देते हैं... और क्या हो अगर हम इनके साथ खेल कर दें!”
― Vandana Yadav, पंजा
“इंसान को गलतियों का पिटारा कहते हैं। अब समझ आया कि यह सच ही कहा जाता है। ये लोग स्वार्थी तो होते हैं पर इन्हें ठीक से स्वार्थी बनना भी नहीं आया। ना जानवरों की भाषा समझी,ना हमारा व्यवहार ही समझना चाहा और तो और ये लोग प्रकृति को भी समझना नहीं चाहते। इन्हें तो मैं स्वार्थी भी नहीं कह सकता। अपने ही जीवन में आग लगाने लगा रहे हैं। इनके किये की सजा सबको भुगतनी पड़ती है। एक दिन दुनिया ख़त्म होगी इनकी वजह से पर इनके साथ मारे जायेंगे हम भी।”
― Vandana Yadav, पंजा
“पहले-पहल मुझे यह सोचना ही अजीब लगता था कि दिन-रात हमारे साथ रहकर भी इंसान ने हमारी बोली समझने की कोशिश क्यों नहीं की? हैरानी अब भी होती है कि अगर ये लोग थोड़ी भी कोशिश करते तो हमारी अनजान दुनिया के रास्ते इनके लिए खुल जाते। मगर इंसान तो फिर इंसास ठहरा। जिनसे वह डरता है, उन्हीं से सीखता है। जिसपर अधिकार कर लेता है, उसको डराने में जुट जाता है। पालतू बना लिये गये जीव-जंतुओं को वह अपने अनुकूल बनाने में लगा रहता है। इंसानी प्रजाति किसी को अपने बराबर नहीं मानती। ये लोग किसी के द्वारा खुदको काबू में कर लिया जाना कुबूल लेते हैं या किसी पर काबू पाना इनके लिए सामान्य घटना हो सकती है। बस किसी को अपने समकक्ष मानना इनके उसूलों के खिलाफ है।" जीवन भर के अनुभव को आधार बनाकर बंधु इंसानी व्यवहार की तस्वीर बना रहा था।”
― Vandana Yadav, पंजा
“महत्वपूर्ण और महत्वहीन के साथ व्यवहार करने के बारीक अंतर को इंसान ने बहुत बारीकी से समझा है। सोने पर सुहागा यह कि इंसान ऐसे अंतर को दिखाने में कमी भी नहीं छोड़ते। जिसे महत्वपूर्ण मानते हैं, उसे सर-माथे पर बैठा लेते हैं। इसके उलट जिसे महत्वहीन करार दे देते है, उसकी मिट्टी पलीद करने में भी कमी नहीं छोड़ते। यह कैसे संभव है कि आज जो महत्वपूर्ण है, वह कल महत्वपूर्ण नहीं रहेगा। हमारे साथ रहने के बावजूद इंसान ने हमसे कुछ नहीं सीखा।”
― Vandana Yadav, पंजा