खांडव दाह Quotes

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खांडव दाह (कृष्ण की आत्मकथा, # 5) खांडव दाह by Manu Sharma
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“मोह को भोगते हुए भी मैं मोह को छोड़ना जानता हूँ।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“मनुष्य उपकार भूल सकता है, पर अपकार नहीं भूलता।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“प्रेम एक ऐसी अग्नि है, जिसमें डूबनेवाला व्यक्ति न जल्दी जलता है और न जल्दी मरता है, केवल”
Manu Sharma, खांडव दाह
“कौरवों ने भी समझा कि इस सबके पीछे मेरा ही हाथ है! पर वे अब कर क्या सकते थे! इधर अब जो सुनता कि पांडवों ने राजभवन छोड़ दिया है, उसे आघात लगता। अनेक प्रश्न उसके मन में पैदा होते। मैंने सोचा, क्यों न इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाया जाए। जैसाकि आप जानते हैं, मेरे पास ऐसे कामों के लिए बस एक ही व्यक्ति था—और वह था छंदक। मैंने उसे एकांत में ले जाकर समझाया कि प्रजा में इस घटना का प्रचार होना चाहिए कि पांडवों ने राजभवन छोड़ दिया है। संप्रति वे प्रपितामही की शरण में हैं। यह सूचना स्वयं अनेक प्रश्नों को जन्म देगी। क्यों चले गए? अवश्य कौरवों ने अवांछनीय किया होगा। जब राज्य का विभाजन हो ही गया था, तब तो एक-न-एक दिन उन्हें जाना ही था। फिर इतनी जल्दी क्या थी! शंका वह अग्नि है, जिसमें ताप कम और धुआँ अधिक होता है।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“जब वाणी बंधन और पराधीनता का कारण बने तो उसे अधिक-से-अधिक विश्राम ही देना चाहिए।’’ मैंने कहा।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“संदेह रस्सी को भी साँप में बदल लेता है और विश्वास साँप को भी रस्सी बना देता है।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“शंका वह अग्नि है, जो स्वविवेक को ही जलाती है, जिसका कड़ुवा धुआँ हमें अंधा बना देता है और हम वास्तविकता नहीं देख पाते।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“जगत् में हर रोग की ओषधि है, पर शंका की कोई ओषधि नहीं।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“न्याय उनके साथ होता है, जिनकी भुजाओं में ताकत होती”
Manu Sharma, खांडव दाह
“दुष्कर्मों का फल प्रभु देता है या नहीं, यह तो मैं नहीं जानता; पर दुष्कर्म अपने जन्म के समय से ही अपने कर्मी को प्रताड़ित करना आरंभ कर देते हैं—कभी पश्चात्ताप की अग्नि में जलाकर, कभी भविष्य के प्रति आतंकित करके।”
Manu Sharma, खांडव दाह
“मनुष्य को स्वार्थ के लिए झूठ बोलना जितना आसान है, परार्थ के लिए झूठ बोलना उतना ही कठिन।”
Manu Sharma, खांडव दाह