(?)
Quotes are added by the Goodreads community and are not verified by Goodreads. (Learn more)

“कौरवों ने भी समझा कि इस सबके पीछे मेरा ही हाथ है! पर वे अब कर क्या सकते थे! इधर अब जो सुनता कि पांडवों ने राजभवन छोड़ दिया है, उसे आघात लगता। अनेक प्रश्न उसके मन में पैदा होते। मैंने सोचा, क्यों न इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाया जाए। जैसाकि आप जानते हैं, मेरे पास ऐसे कामों के लिए बस एक ही व्यक्ति था—और वह था छंदक। मैंने उसे एकांत में ले जाकर समझाया कि प्रजा में इस घटना का प्रचार होना चाहिए कि पांडवों ने राजभवन छोड़ दिया है। संप्रति वे प्रपितामही की शरण में हैं। यह सूचना स्वयं अनेक प्रश्नों को जन्म देगी। क्यों चले गए? अवश्य कौरवों ने अवांछनीय किया होगा। जब राज्य का विभाजन हो ही गया था, तब तो एक-न-एक दिन उन्हें जाना ही था। फिर इतनी जल्दी क्या थी! शंका वह अग्नि है, जिसमें ताप कम और धुआँ अधिक होता है।”

Manu Sharma, खांडव दाह
Read more quotes from Manu Sharma


Share this quote:
Share on Twitter

Friends Who Liked This Quote

To see what your friends thought of this quote, please sign up!

0 likes
All Members Who Liked This Quote

None yet!


This Quote Is From

खांडव दाह (कृष्ण की आत्मकथा -V) खांडव दाह by Manu Sharma
63 ratings, average rating, 2 reviews

Browse By Tag