Ramdhari Singh 'Dinkar' > Quotes > Quote > Sudhanshu liked it
“हम भी हैं मानवी कि ज्यों ही प्रेम उगे, रुक जाएँ,
मिले जहाँ भी दान हृदय का, वहीं मग्न झुक जाएँ?
प्रेम मानवी की निधि है, अपनी तो वह क्रीड़ा है;
प्रेम हमारा स्वाद, मानवी की आकुल पीड़ा है।”
― उर्वशी
मिले जहाँ भी दान हृदय का, वहीं मग्न झुक जाएँ?
प्रेम मानवी की निधि है, अपनी तो वह क्रीड़ा है;
प्रेम हमारा स्वाद, मानवी की आकुल पीड़ा है।”
― उर्वशी
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