Kaise Quotes

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Muneer Niyazi
“कैसे कैसे लोग हमारे जी को जलने आ जाते हैं,
अपने अपने ग़म के फ़साने हमें सुनाने आ जाते हैं !

मेरे लिए ये गैर हैं और मैं इनके लिए बेगाना हूँ,
फिर भी ये एक रस्म-ए-जहां है जिसे निभाने आ जाते हैं !

इनसे अलग मैं रह नहीं सकता इस बेदर्द ज़माने में,
मेरी ये मजबूरी मुझको याद दिलाने आ जाते हैं !

सबकी सुन कर चुप रहते हैं दिल की बात नहीं कहते,
आते आते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं !”
Muneer Niyazi
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