Find & Share Quotes with Friends
“(रोते हुए) आर्य परदेश तो नहीं जा रहे, परलोक जा रहे हैं। अतः अब हम लौटकर क्या करेंगे? चंदनदास : आर्ये! ठीक है मेरा वध हो सकता है, पर मित्र के कार्य के कारण ही तो, फिर ऐसे हर्ष के अवसर पर भी रोती हो? कुटुम्बिनी : आर्य! यही बात है तो घरवाले क्यों लौट जाएँ? चन्दनदास : आर्ये! तो तुम्हारा क्या निश्चय है? कुटुम्बिनी : (रोकर) स्त्री को तो पति के चरणों का ही अनुगमन करना चाहिए। चंदनदास : आर्ये! यह दुराग्रह है। यह अबोध बच्चा है। इसपर तो दया करो। कुटुम्बिनी : कुलदेवता प्रसन्न होकर इस बालक की रक्षा करें। वत्स, आगे पिता नहीं रहेंगे! इनके चरणों को प्रणाम करो। पुत्र : (पांवों पर गिरकर) पिता! आप चले जाएंगे? अब मैं क्या करूं? चंदनदास : पुत्र! उस देश में चले जाना, जहां चाणक्य नहीं हो। चाण्डाल : आर्य चंदनदास, सूली गड़ चुकी है। सावधान हो जाओ! कुटुम्बिनी : आर्यो! रक्षा करो, रक्षा करो! चंदनदास : भद्र! क्षण-भर ठहरो। प्राणप्रिये, क्यों रोती हो? अब वे देव नन्द स्वर्ग चले गए जो नित्य स्त्रियों पर दया किया करते थे। एक चांडाल : अरे, वेणुवेत्रक! इस चन्दनदास को पकड़। घर के लोग अपने-आप लौट जाएंगे। दूसरा चांडाल : अरे, वज्रलोमक! अभी पकड़ता हूं। चंदनदास : भद्रमुख! एक क्षण और ठहर जाओ। मैं तनिक अपने पुत्र का आलिंगन कर लूं। (पुत्र से आलिंगन कर, स्नेह से उसका सिर सूंघकर) पुत्र! मृत्यु तो कभी न कभी वैसे भी होगी ही, इसलिए मैं मित्र का कार्य पूरा करते हुए इस समय मर रहा हूँ। पुत्र : तात, क्या यह हमारा कुल-परम्परा से आया धर्म है? (पैरों पर गिरता है।) दूसरा”
―
Murdarakshas
Share this quote:
Friends Who Liked This Quote
To see what your friends thought of this quote, please sign up!
0 likes
All Members Who Liked This Quote
None yet!
This Quote Is From
Browse By Tag
- love (102416)
- life (81015)
- inspirational (77508)
- humor (45298)
- philosophy (32001)
- inspirational-quotes (28740)
- god (27133)
- wisdom (25220)
- romance (24975)
- truth (24938)
- poetry (24687)
- life-lessons (23059)
- quotes (21542)
- death (21018)
- happiness (19053)
- hope (18939)
- faith (18728)
- inspiration (18089)
- relationships (16150)
- motivational (16122)
- spirituality (16121)
- religion (15600)
- life-quotes (15350)
- writing (15191)
- love-quotes (14970)
- success (14262)
- motivation (14121)
- time (13062)
- science (12342)
- motivational-quotes (12175)

