“भारती की प्रतिभा का डंका बजता था, पर कांता की बौद्धिक और रचनात्मक क्षमता से कोई परिचित नहीं था। मात्र शरीर सांस्कृतिक असन्तुलन पैदा करते हैं क्योंकि कोई व्यक्ति बहुत दिनों तक मात्र शरीर के साथ नहीं रह सकता...अन्तत: औरत भी शरीर पर हुए पुरुष के आधिपत्य से घबराने लगती है और मात्र भोग्या होने की नियति से टकराने लगती है। शरीर सैक्स का भी अन्तिम सत्य नहीं है। उद्दीप्त शरीर का सम्मोहन जब तक संवेगों की सांस्कृतिक सन्तुष्टि का पर्याय नहीं बनता, तब तक शरीर शरीर ही रहता है, वह नदी नहीं बनता...वह नदी जो कई स्तरों पर बहती है! जिसकी निचली सतह का पानी चट्टानों को तोड़ता है और खुरदरे पत्थरों को अपने गर्भ में आकार देकर बालू की भीति पर पत्थरों का भरोसेमंद पथ बना देता”
―
Jalti Hui Nadi
Share this quote:
Friends Who Liked This Quote
To see what your friends thought of this quote, please sign up!
0 likes
All Members Who Liked This Quote
None yet!
This Quote Is From
Browse By Tag
- love (101912)
- life (80137)
- inspirational (76551)
- humor (44571)
- philosophy (31288)
- inspirational-quotes (29075)
- god (27008)
- truth (24874)
- wisdom (24849)
- romance (24515)
- poetry (23498)
- life-lessons (22777)
- quotes (21237)
- death (20661)
- happiness (19054)
- hope (18703)
- faith (18542)
- inspiration (17642)
- spirituality (15869)
- relationships (15779)
- motivational (15627)
- life-quotes (15470)
- religion (15463)
- love-quotes (15200)
- writing (15002)
- success (14237)
- motivation (13563)
- time (12931)
- travel (12628)
- motivational-quotes (12252)

