“शिवजी को रस-क्रीड़ा से असंपृक्त करके संतान-उत्पत्ति के लिए प्रवृत्त होने की प्रार्थना करें। विष्णुजी ने देवताओं से कहा कि स्त्री-पुरुष के रति विहार के बीच बाधा डालना महापाप होता है। उन्होंने देवताओं को प्राचीन इतिहास का उदाहरण देकर यह बताया कि शिवजी के रति विहार में बाधा बनकर वे पाप के भागी न बनें। विष्णुजी ने बताया कि दुर्वासा ने पुराने समय में रंभा और इन्द्र के बीच बाधा बनकर उन दोनों का वियोग कराया था, जिसके फलस्वरूप उनका अपनी स्त्री से वियोग हुआ। दूसरी स्थिति में बृहस्पति ने कामदेव का घृताची से वियोग कराया था जिसके फलस्वरूप छ: महीने के भीतर ही चंद्रमा ने उनकी स्त्री का हरण कर लिया था। रति पीड़ित चंद्रमा का मोहिनी से वियोग कराने के कारण गौतम को बहुत समय तक अपनी पत्नी का वियोग सहना पड़ा था। राजा हरिश्चंद्र ने एक निर्जन वन में एक किसान का एक शूद्रा के साथ वियोग कराया तो उसे विश्वामित्र के क्रोध का पात्र बनना पड़ा और अपनी स्त्री तथा पुत्र आदि से अलग होना पड़ा।”
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Shiv Puran
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