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Leo Tolstoy

“ने गहरी साँस भरी और कहा, ‘‘यह सारी दुनिया तुम्हारे सामने है। यहाँ आओ और जाओ। चूँकि मैं कुछ सालों से बिस्तर पर पड़ा हूँ, इसलिए तुम सोचते हो कि तुम सबकुछ देख रहे हो और मैं कुछ नहीं देख सकता हूँ। मेरे बेटे, तुम कुछ भी नहीं देख पा रहे हो, क्योंकि गुस्से ने तुमको अंधा कर दिया है। दूसरों की गलतियाँ तुम्हारे सामने हैं, पर तुम्हारी अपनी गलतियाँ तुम्हारे पीछे हैं। तुम कहते हो कि उसने गलत किया है; पर यदि गलत करनेवाला वही एक आदमी होता तब इस दुनिया में कोई बुराई नहीं होती। क्या किसी एक आदमी की वजह से लोगों में बुराई पैदा होती है? झगड़े के लिए दो का होना जरूरी है। तुम उसके अपराध देख सकते हो, पर तुम अपने अपराध नहीं देख पाते हो। यदि केवल उसी ने गलत किया होता तब कोई झगड़ा नहीं होता।”

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