हम किसी की प्रतीक्षा क्यों करते हैं?

प्रतीक्षा के बारे में क्या कहा जा सकता है कि वह कैसी है।

कभी कभी लगता है कि आने वाला क्षितिज के उस पार से आगे बहुत दूर से आएगा। उस क्षितिज की ओर चल पड़ें तो हो सकता है कि उम्र भी कम ठहरे। कविता में भी क्या कहा जा सकता है कि प्रतीक्षा कैसी होती है। केवल बेचैनी, थकन, उदासी, अकेलेपन और स्थगित जीवन को लिखा जा सकता है थोड़ा-बहुत।दूर, बहुत दूर होकर भी कभी दूर नहीं हुआ जा सकता प्रतीक्षा से। प्रतीक्षा मौसमी बादलों की तरह फिर से घिर आती है। बहुत सी कविताएं लिखने के बाद लगता है कि लिखना भूलना नहीं है। ये प्रतीक्षा को शब्दों का आकार देना है। तब मन अचानक लिखना छोड़ देता है। हालांकि ये भी कम नहीं है कि प्रतीक्षा में कविता, कन्धे पर हाथ रखे बैठे एक दोस्त की तरह होती है। * * * रेगिस्तान बादलों की प्रतीक्षा करता रहता है ताकि वह खिल सके। हरियल हो। हम किसी की प्रतीक्षा क्यों करते हैं? क्या हम हरे हो जाना चाहते हैं। क्या हम अपने सर पर सफेद नारंगी फूल लगाए झूमना चाहते हैं। क्या हम हमारे बदन पर नन्हे घोंघों की गुदगुदी महसूस करना चाहते हैं। हम जो चाहते हैं, क्या उसके बारे में हमारा बादल जानता है?
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Published on June 26, 2021 02:31
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Kishore Chaudhary
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