रेत ने हवा से कहा
आओ कुछ रोज़ के लिए
किसी के घर चलें।
यूं बियाबां मैं बैठे-बैठे ऊब होने लगी।
* * *
नीमपागल आदमी का ख़्वाब
उसकी गर्दन पर फिसलता बार-बार।
भरी भरी पीठ पर पड़े
कॉटन के कुर्ते पर सजे फूलों से कहता।
तुम भी अकेले कब तक बैठे रहोगे?
* * *
इच्छा ज़हर है
पूरी होते ही, आप मर जाती है।
* * *
इसके आगे भी बहुत कुछ लिखा। उसे यहाँ नहीं लिख रहा हूँ। अब मुझे अजीब लगता है, असल चाहना का लिखना।
Published on May 07, 2019 22:14