आको बाको Quotes

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आको बाको आको बाको by Divya Prakash Dubey
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आको बाको Quotes Showing 1-5 of 5
“ऊपरवाला मेहरबान होता है तब आदमी कविता लिख पाता है और जब ऊपरवाला बहुत मेहरबान होता है तब वो जीवन को कविता बना देता है।”
Divya Prakash Dubey, आको बाको
“नदी पार करने वाले तीन तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो पार हो जाते हैं और पलटकर नहीं देखते। दूसरे वो जो पार होने के बाद दूसरों को पार कराते हैं। और तीसरे वो जो नदी हो जाते हैं।”
Divya Prakash Dubey, आको बाको
“दुनिया को समझने की कोशिश जब भी हुई है, हर खोज यहीं पर आकर रुकी है कि ये दुनिया रहने लायक नहीं है। यहाँ आदमी, आदमी बनकर नहीं रह सकता।”
Divya Prakash Dubey, आको बाको
“इस दुनिया को समझने की कोशिश जब भी हुई है, हर खोज यहीं पर आकर रुकी है कि ये दुनिया रहने लायक नहीं है। यहाँ आदमी, आदमी बनकर नहीं रह सकता।”
Divya Prakash Dubey, आको बाको
“जिंदगी बिस्तर की सिलवट जैसे हर सुबह उलझी हुई मिलती है। इसीलिए उलझी हुई सिलवट को वापस ठीक करने की कवायद में लोग जिंदगी के चार सिरे खींचकर रोज उसको सँवारते रहते हैं। जिंदगी का काम है उलझाना। आदमी का काम है सुलझाना और उस सुबह का इंतजार करते रहना जिस दिन सिलवट नहीं मिलेगी।”
Divya Prakash Dubey, आको बाको