Bharat Quotes

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Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai? (Hindi Edition) Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai? by F. Max Müller
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“ब्राह्मण, सामाजिक और बौद्धिक रूप से उच्च वंश के लोगों का वर्ग था। इसमें सन्देह नहीं कि वे भारत के प्राचीन समाज के कुछ मान्य और अत्यन्त अनिवार्य तत्त्व थे। चूँकि वे दूसरों के लिए रह रहे थे, और जीवन के ज्यादातर लाभदायी कामों से अलग थे, यह एक सामाजिक और जल्दी ही धार्मिक कर्तव्य बन गया कि समुदाय उनका पोषण करे।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“आश्वलायन के गृह्यशास्त्रों (चार. 7) की अपनी टीका में दिया है। “पितरों के लिए ब्राह्मणों को श्रद्धा के साथ दी जाने वाली चीज श्राद्ध है।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“भोजन तैयार किया जाता था और उसका स्वयं स्पर्श करने के पहले उसे देवताओं को कुछ समर्पित करना होता था, जिसे वैश्वदेव अर्पण कहा जाता था, जिसमें मुख्य देवता होते थे अग्नि, विश्वदेव सोम, धन्वन्तरि, सुहु और अनुमति (चन्द्रमा की कलाएँ), प्रजापति, द्यावा पृथ्वी, आकाश और पृथ्वी और स्विश्तकृत अर्थात चूल्हे की आग। इस प्रकार चारों दिशाओं के देवों को सन्तुष्ट करके गृहस्थ को कुछ सामग्री खुले आकाश में फेंकना पड़ता था, जो प्राणियों के लिए थी,”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“ब्रह्म यज्ञ, अर्थात वेदों का अध्ययन और शिक्षण (कभी-कभी इसे आहूत कहा जाता है)। पितृ यज्ञ अर्थात मृतकों को रोटी और जल प्रदान करना (कभी-कभी इसे प्रासिता कहा जाता है)। देव यज्ञ अर्थात देवताओं को चढ़ावा देना (कभी-कभी इसे हूत कहा जाता है)। भूत यज्ञ अर्थात प्राणियों को भोजन देना (कभी-कभी इसे प्रहूत कहा जाता है)। मनुष्य यज्ञ अर्थात अतिथियों का स्वागत करना (कभी-कभी इसे ब्राह्म्य हूत कहा जाता है)।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“दैनन्दिन पितृयज्ञ पाँच यज्ञों में से एक है, जिसे कभी-कभी महायज्ञ कहा जाता है, जिसे हर विवाहित व्यक्ति को रोज करना चाहिए। इनका उल्लेख गृह्य सूत्र (तीन, 1) में देवयज्ञ देवताओं के लिए, भूतयज्ञ जानवरों आदि के लिए, पितृयज्ञ पितरों के लिए और ब्रह्म यज्ञ ब्राह्मणों के लिए अर्थात वेदों के अध्ययन के लिए और मनुष्य यज्ञ लोगों के लिए अर्थात आतिथ्य के लिए।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“भृगुओं, अंगिराओं, अथर्वनों के परिवारों के पितृ हैं और उन्हें घास पर बैठने”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“वेदों में पितृ को सत्य, सुविदात्र, ऋतवत, कवि, पथिकरित कहा गया है और उनका सबसे ज्यादा लगाया जाने वाला विशेषण है सौम्य, जो कि वैदिक ऋषियों का अत्यन्त प्राचीन नशीला पेय था और जिसके बारे में माना जाता था कि अमरत्व प्रदान करता है,”
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“तारे उन अच्छे लोगों का प्रकाश हैं जिन्होंने स्वर्ग में प्रवेश किया है।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“हम पढ़ते हैं कि हमारे प्रपितामह स्वर्ग में हैं, पितामह आकाश में हैं, पिता पृथ्वी में हैं। पहले आदित्यों के संग हैं, दूसरे रुद्रों के संग हैं और अन्तिम वसुओं के संग हैं।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“इनमें एक है सुदूर, अर्द्धविस्मृत और कुछ परिवारों के या वेदों के कवियों के अनुसार सम्पूर्ण मानव जाति के लगभग मिथकीय पूर्वज और दूसरा वह है जिसमें वे पितृ हैं जो हाल ही में चले गए हैं और जिनका अभी भी व्यक्तिरूप से स्मरण किया जाता है और सम्मानित किया जाता है। आमतौर पर पुराने पूर्वज देवताओं के ज्यादा निकट होते हैं।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“जिस प्रकार प्रकृति की देदीप्यमान शक्तियों से देवों का उदय हुआ था उसी प्रकार मृतकों के कथनों से कुछ बातें उभरीं, जैसे पितृ, पिता, प्रेत, गत, दयालु, पूर्वज, छाया, आत्माएँ या प्रेत, जिनकी उपासना जितने पूर्ण रूप से भारत में विकसित हुई थी उतनी और कहीं नहीं।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“देव का अर्थ है देदीप्यमान और कुछ नहीं। देदीप्यमान अर्थ का उपयोग लगातार आकाश, तारे, सूर्य, उषा, दिन, वसन्त, नदियों, पृथ्वी के लिए होता रहा”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“वैदिक भाषा का यौवन और वयस्कता उस काल के बहुत परे था, जिसने बुद्ध के उपदेशों को जन्म दिया था। बुद्ध चाहे संस्कृत और शायद वैदिक संस्कृत जानते रहे होंगे, लेकिन उन्होंने बारम्बार इस बात पर जोर दिया कि उनके शिष्य उनके सिद्धान्तों को आम जन की भाषा में बताएँ।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“पाँचवीं सदी ईस्वी पूर्व में बौद्ध धर्म का उदय हुआ। यह ऐसा धर्म था जो वैदिक धर्म के अवशेषों पर निर्मित हुआ और इसने परम्परावादी ब्राह्मणों के द्वारा वेदों को जो दैवी सत्ता प्रदान की गई थी उसको अस्वीकार किया।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“हिस्टारिकल स्केचेज़ ऑफ सेवेज लाइफ”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“भारत के पाँच सम्भागों में ब्राह्मणों को अत्यन्त सम्माननीय माना जाता है। वे अन्य तीन जातियों के साथ नहीं चलते और मिश्रित वर्गों के लोग उनसे और भी दूर होते हैं। वे अपने ग्रन्थों चारों वेदों का सम्मान करते हैं, जिनमें लगभग एक लाख श्लोक हैं...वेदों को आगे की पीढ़ियों को कागज पर लिखकर नहीं बल्कि मौखिक रूप से सौंपा गया है।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“कनफ्यूशियस के समान होना चाहिए, जिसके कठोर अध्ययन के द्वारा उसके यीह राजा के बन्धन तीन बार कटकर अलग हो गए थे, क्योंकि वे जीर्ण हो गए थे। इसी प्रकार सुई शीह का हुआ जो किसी किताब को बारम्बार एक सौ बार पढ़ता था।’ इसके बाद वह एक टिप्पणी करता है जो अंग्रेजी भाषा से कहीं ज्यादा चीनी भाषा में समझने योग्य है : ‘एक बैल के बाल हजारों होते हैं, लेकिन एक गैंडे का एक ही होता है।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“बच्चे जब 6 साल के होते हैं तब उनचास अक्षर और दस हजार संयुक्त अक्षर सीखते हैं और उन्हें सामान्यत: आधे साल में समाप्त कर देते हैं। यह लगभग तीन सौ श्लोकों के बराबर और प्रत्येक श्लोक बत्तीस अक्षरों का होता है। इसे मूल रूप से महेश्वर के द्वारा पढ़ाया गया था। आठ साल में, बच्चे पाणिनि का व्याकरण याद करना प्रारम्भ कर देते हैं और उसे आठ माह में पढ़ लेते हैं। इसमें 1000 श्लोक होते हैं जिन्हें सूत्र कहा जाता है। इसके”
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“वे गटकमाला को भी कंठस्थ करते हैं जिसमें बुद्ध के पिछले जीवनों का विवरण दिया गया है।”
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“पुनीत कर्तव्य है कि वे इन जीवित पुस्तकालयों से जो कुछ सीख सकते हैं, अवश्य सीख लें। यदि यह श्रोत्रिय-समुदाय समाप्त हो गया, तो इस प्राचीन साहित्य का बहुत बड़ा अंश उन्हीं के साथ समाप्त हो जाएगा।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“ऋग्वेद पढ़नेवाले प्रत्येक विद्यार्थी को आठ वर्ष तक गुरु के घर में बिताना होता है। उसे दस ग्रन्थ पढ़ने होते हैं : प्रथम, ऋग्वेद की ऋचाएँ, फिर यज्ञों का गद्य ग्रन्थ जिसे ब्राह्मण कहते हैं, फिर अरण्यक, फिर घरू समारोहों के नियमों को, और अन्त में शिक्षा, व्याकरण, कल्प, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष का अध्ययन करना पड़ता है।”
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“भारत में श्रोत्रियों की स्मरण शक्ति से प्राप्त कर सकते हैं। ये देशी छात्र वेद को कंठस्थ कर लेते हैं और वे अपने गुरु से इसे सीखते हैं, किसी पांडुलिपि से नहीं,”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“भारत में लेखन चौथी सदी ईस्वी पूर्व के पहले अज्ञात था, फिर भी हमें यह विश्वास करने के लिए कहा जाता है कि वैदिक साहित्य अपने तीन सुपरिभाषित कालों अर्थात मंत्र, ब्राह्मण, और सूत्र कालों में कम से कम एक हजार वर्ष ई.पू. अपने वर्तमान रूप में निर्मित हो चुका था।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“(325 ई.पू.) और इसलिए उसका सम्पर्क भारत के बन्दरगाहों में आवाजाही करने वाले व्यापारियों से हुआ था, ने उतना ही सही कहा था कि “भारतीय लोग पीट-पीट कर जमाई गई रुई पर पत्र लिखते थे।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“एनेक्सिमेंडर एनेक्सिमिनिस का, एनेक्सिमिनिस एनाक्सागोरस का और एनक्सवागोरस पेरिकल्स का शिक्षक था।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“और इतिहास के पिता हेरोडोटस ने उनकी कृतियों का अकसर उपयोग किया था।”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“पहला लिखित चमड़ा मरे की पुस्तक थी, जिसे पेरीजेसिस या पीरियोडोस कहा गया था, या यदि सामुद्रिक यात्राओं की बात करें तो ये पेरीप्लस अर्थात मार्गदर्शक पुस्तकें, ये वे किताबें थीं जो यात्रियों को किसी प्रदेश के या शहर के आसपास घुमाती थीं। इन”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“जर्मनों के पास, मकबरों, गोबलेट्स, सार्वजनिक स्मारकों के लिए उनके रूनेस थे लेकिन ये साहित्यिक रचनाओं के लिए नहीं थे। मिलेटस और राजनीतिक और व्यावसायिक जीवन के अन्य केन्द्रों में चाहे कुछ आयोनियनों ने लिखने की कला हासिल कर ली हो, उन्हें लिखने की सामग्री कहाँ से प्राप्त हुई थी? इससे भी ज्यादा यह बात महत्त्व की है”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“कुछ इसलिए कि वे पेरीप्लस नामक छोटे पन्नों का उपयोग कर सकें या यात्रा का ब्यौरा तैयार कर सकें जो नाविकों के लिए उतने ही महत्त्व के थे जिस”
F. Max Müller, Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
“ऋग्वेद की प्राचीनतम पांडुलिपि, जिसे हम जानते हैं, 1500 ईस्वी पूर्व नहीं बल्कि 1500 ईस्वी की है। इस प्रकार इन दोनों में 3000 वर्ष का अन्तर है”
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