Chalta phirta pret Quotes
Chalta phirta pret
by
Manav Kaul194 ratings, 4.23 average rating, 28 reviews
Chalta phirta pret Quotes
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“चुप्पी कैसे कहें?” उसने कहा। “तुम लिखते हो... तुम जानो।” “इन सारे मौन को कहने के लिए एक प्रेत की ज़रूरत होगी... चलते-फिरते प्रेत की... जो बातों को ऐसे कहे कि कविता लगे... हाँ कविता... कविता की ज़रूरत होगी... कविता छुपे हुए वाक्यों को सतह पर आसानी से ले आती है। पर उस प्रेत को सुनने के लिए गहरे उतरना पड़ेगा।” “कितना गहरे?” भूमिका ने चंचलता लिए पूछा। “उतना ही जितनी जगह हमेशा छूटी रहती है हमारे दो संवादों के बीच।” भूमिका चुप रही और वह इस चुप्पी में किसी प्रेत के कुछ कह देने की प्रार्थना करने लगा।”
― Chalta-Phirta Pret । चलता-फिरता प्रेत
― Chalta-Phirta Pret । चलता-फिरता प्रेत
