Khushiyon Ke Guptchar Quotes
Khushiyon Ke Guptchar
by
Geet Chaturvedi55 ratings, 4.42 average rating, 8 reviews
Khushiyon Ke Guptchar Quotes
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“सारी किताबें तुम्हारी आंखों की तरह खुलती हैं
कोर से कोर तक, कवर से कवर तक
किताब के भीतर बैठकर
मैं किताबें लिखता रहा
और तुम कहती रहीं,
मेरी आंखों के पन्ने रह-रहकर फड़फड़ाते हैं.”
― Khushiyon Ke Guptchar
कोर से कोर तक, कवर से कवर तक
किताब के भीतर बैठकर
मैं किताबें लिखता रहा
और तुम कहती रहीं,
मेरी आंखों के पन्ने रह-रहकर फड़फड़ाते हैं.”
― Khushiyon Ke Guptchar
