Betarteeb Panne Quotes
Betarteeb Panne
by
Sanjay Choubey106 ratings, 4.33 average rating, 64 reviews
Betarteeb Panne Quotes
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“और इज्ज़त भी कमाल की चीज है!
उसके छोड़ जाने मात्र से लुट जायेगी, यह मालूम नहीं था,”
― Betarteeb Panne
उसके छोड़ जाने मात्र से लुट जायेगी, यह मालूम नहीं था,”
― Betarteeb Panne
“दिल्ली में बैठी आयरन लेडी के सख्त मिजाज से घाटी में संदेह और अविश्वास की हवा बह रही थी. स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उसने अपने आस्मानी दूतों के कमाल से घाटी का मुख्यमंत्री बदल दिया और देखते ही देखते वर्तमान इतिहास से मिलकर कुछ ऐसी चालें चलने लगा कि बर्फीली घाटी गरमाने लगी. लेकिन इन सबसे बेखबर घाटी में चिनार के पत्ते अपने निराले अंदाज में जमीन पर गिर रहे थे. ऐसे में भारत की आयरन लेडी, जिसे अपनी मौत का अंदेशा हो चला था, को चिनार ने पतझड़ के मौसम में बुलावा भेजा और वह अपने को रोक नहीं पायी. उसे बताया गया था कि ‘हालात ठीक नहीं हैं’, लेकिन उसने अपनी आदतानुसार किसी की नहीं सुनी और 27 अक्टूबर, 1984 की सुबह अपने पोते व पोती के संग लोलाब घाटी से सौ-सवा सौ किलोमीटर दूर श्रीनगर पहुँची.”
― Betarteeb Panne
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“दमयंती जी, पहाड़ी दिल के सच्चे और अक्ल के खोटे. अब इस अक्ल के खोटे को नमकीन चाय पिला दीजिये.’ शर्माती हुई दमयंती ने कहा था, “आप अक्ल के खोटे क्यों होंगे, अक्ल के खोटे तो हम जैसे पहाड़ी होते हैं.” थोड़ी देर की नोक-झोक में पता नहीं चला और लोलाब घाटी की रूमानी हवाओं का जादू चल गया, जिसमें अक्ल के खोटे व दिल के सच्चे दो पहाड़ी खो गये. दोनों पहाड़ी पौने दो महीने लोलाब घाटी में खोये रहे.”
― Betarteeb Panne
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“तेज - बिस्मिल्लाहि र-रहमानि र-रहीम अल हम्दु लिल्लाहि रब्बि ल-आलमीन अर रहमानि र-रहीम मालिकि यौमि द-दीन इय्याक न'आबुदु व इय्याक नस्त'ईन इह्दिन स-सिरात अल-मुस्तक़ीम सिरात अल-लादीना अन'अमता अलैहिम ग़ैरिल मग़दूबि अलैहिम वलद दाल्लीन”
― Betarteeb Panne
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“इसी बीच 1987 का चुनावी मौसम आया. कहते हैं दिल्ली के इशारे पर धाँधली हुई और दिल्ली के प्यादे को रियासत की कमान सौंप दी गयी. इसी के साथ शिकायतों को अल्लाह की जुबान मिली और अल्लाह के टाइगर्स को एक गज़ब का खिलौना, जिसे अल्लाह की बजाय मिखाइल कलाश्निकोव ने बनाया था. इस”
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“मोहम्मद नदीम लोन, तुमने अल्लाह व उसके रसूल की तौहीन की है.” “तुम्हारी इतनी मजाल कि तुम एक काफिर के बच्चे को नबी कहो. हिमाकत देखो तुम उसे नया नबी कह रहे हो.” “मोहम्मद नदीम लोन, तुमने कुफ्र किया है. तुम्हे सजा मिलनी चाहिए.” बूढा नदीम लोन गरम होता है, ‘क्या बेवकूफी है. जुबान से कुछ निकला नहीं कि उसे मजहब से जोड़ देते हो. ऐसा क्या कह दिया मैंने कि कुफ्र हो गया.’ फिर वह थोड़ा ठंडा होता है और सफाई देता है, ‘अरे तुम सब मेरे बच्चों की तरह हो, बच्चों में नबी दिखते हैं मुझे. तुम भी बूढ़े हो जाओगे और जब इन आँखों से दिखना कम हो जायेगा, तो मासूम बच्चों में तुम्हें खुदा का अक्स दिखेगा, नबी दिखेंगे.’ बूढा”
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“लोलाब घाटी के चमन में खिले नए फूल से मोहम्मद नदीम लोन नदीम व ख़ादिम होने की बात कर रहे थे, चिनार के मोहपाश में बंधी भारत की आयरन लेडी श्रीनगर में पतझड़ का आनंद ले रही थी. उसने शंकराचार्य पहाड़ी पर स्थित मंदिर के दर्शन किये; वह कश्मीरी शैव संत लक्ष्मण जू से मिली और कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी शारिका माँ के मंदिर गई. जबतक यहाँ रही बड़ी प्रसन्न दिखी, मौत के अंदेशे के बावजूद, शायद चिनार का जादू था. इसके बाद राजनीति के अखाड़े में या कि लोगों के बीच वापस लौटते हुए वह भुवनेश्वर में खड़ी थी, जहाँ उसके पिता को पहली बार दिल का दौरा पड़ा था, जहाँ लोगों ने कभी उसपर पत्थरबाजी की थी और उसकी नाक टूट गयी थी. भले ही अँधेरा हो चुका था, लोग प्रतीक्षा में थे कि वह कुछ कहे और उसने कहा – “.... मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को मजबूत करने के काम आएगा.”
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