हिन्दनामा [ Hindnama ] Quotes
हिन्दनामा [ Hindnama ]
by
Krishna Kalpit10 ratings, 3.90 average rating, 2 reviews
हिन्दनामा [ Hindnama ] Quotes
Showing 1-3 of 3
“सुबह-ए-बनारस थी शाम-ए-अवध थी साँय-साँय करती शब-ए-सहरा थी और इस देश की दोपहरें पसीने और ख़ून से लथपथ और कोलतार की तरह पिघली हुई थीं!”
― Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
― Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
“कुछ मर कर भी जीवित थे कुछ जीते-जी मर गए थे कुछ को सचमुच मार डाला गया था और ऐसे कवियों की संख्या भी असंख्य थी जिन्हें पुरस्कार देकर मार डाला गया था इस महादेश में कविता लिखना जीवन-मरण का प्रश्न था!”
― Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
― Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
“यह महादेश शताब्दियों से जलता हुआ एक पुस्तकालय है एक विशाल मणिकर्णिका-घाट एक अखण्ड-धूणा जिसकी राख दसों दिशाओं में उड़ती रहती है!”
― Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
― Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
