रंग-ए-ख्याल | Rang-e-Khayaal Quotes

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रंग-ए-ख्याल | Rang-e-Khayaal रंग-ए-ख्याल | Rang-e-Khayaal by Piyush Mishra
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“कुछ पन्ने हैं, जो कभी पलटते नहीं, 
कुछ यादें हैं, जो कभी बिखरती नहीं, 
फलसफे बहुत हैं, कयामत के दिनों के 
पर कुछ शामें है, जो कभी गुज़रती नहीं। 
है कुछ वक्त अधूरा महफिलों में 
है कुछ जाम बचा, मयखाने का, 
हैं कुछ आदतें नशे सी, जो सुधरती नहीं 
और अब भी कुछ शामें हैं, जो कभी गुज़रती नहीं। 
कुछ बात बगावत की बची है अब भी 
कुछ बात कयामत की बची है अब भी, 
पर बातें अब ज़ुबां से निकलती नहीं, 
और कुछ शामें हैं, जो कभी गुज़रती नहीं।”
Piyush Mishra, रंग-ए-ख्याल | Rang-e-Khayaal
“वक्त गुज़र गया, 
वो ख्याल अभी बाकी है, 
दिल में दफन है कहीं, 
वो सवाल अभी बाकी है, 
वो ज़िक्र नहीं करते, 
क्यूँ छोड़ गए थे भीड़ में, 
उनका हमारा वो मलाल अभी बाकी है। 
है हमारा भी हिसाब, 
कुछ जमाने भर 
मोहब्बत का होना हलाल अभी बाकी है, 
उनके हिस्से का तमाशा, 
बहुत किया उनने, 
हमारे भी हिस्से का, 
बवाल अभी बाकी है।”
Piyush Mishra, रंग-ए-ख्याल | Rang-e-Khayaal
“होते थे कभी इंसानों में बेईमान 
अब बेईमानों में इंसान कहाँ है।”
Piyush Mishra, रंग-ए-ख्याल | Rang-e-Khayaal
“वो मिटा रहे हैं मेरा वजूद, पर मेरी पहचान अभी बाकी है, जनाजा़ उठा नहीं है अभी, थोड़ी जान अभी बाकी है। गड़ा है सीने में खंजर, तो क्या, सीने में फौलाद अभी बाकी है, रिश्तेदार खिलाफ हैं तो भी कोई गम नहीं साहब,मेरे पास मेरी औलाद अभी बाकी है। गुनाहों के रास्तों में मेरे कदम न गुज़रें, इतना मेरा ईमान अभी बाकी है, मेरी कौम, मेरा मजहब मुझसे छीन लिया तुमने, मेरे अंदर मेरा स्वाभिमान अभी बाकी है। सियासत खेली है, जमाने ने हजारों, सियासत का अंजाम अभी बाकी है, लूटा होगा तुमने भले ही खुदा को, इंसान के अंदर का इंसान अभी बाकी है।”
Piyush Mishra, रंग-ए-ख्याल | Rang-e-Khayaal