महाभोज Quotes
महाभोज
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Mannu Bhandari679 ratings, 4.33 average rating, 60 reviews
महाभोज Quotes
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“जो ज़िंदगी को इतना प्यार करता हो...अपनी ही नहीं, हर किसी की ज़िंदगी को...वह आत्महत्या करेगा? नहीं साहब, नहीं...नहीं! उसे मारा गया है!’ ‘पर किसने मारा? क्यों मारा?”
― महाभोज
― महाभोज
“कुछ बातें, कुछ तथ्य, कुछ स्थितियाँ प्रचलित होते-होते सबके बीच इस तरह स्वीकृति पा लेती हैं कि वे फिर लोगों की सोच की सीमा में रहती ही नहीं।”
― महाभोज
― महाभोज
“आदमी जब अपनी सीमा और सामर्थ्य को भूलकर कामना करने लगे तो समझ लो, पतन की दिशा में उसका क़दम बढ़ गया।”
― महाभोज
― महाभोज
“लोगों के घर, ज़मीन और गाय-बैल ही रेहन नहीं रखे हुए हैं जोरावर और सरपंच के यहाँ, उनकी आवाज़ और जबान तक बंधक रखी हुई है।”
― महाभोज
― महाभोज
“और जो ज़िंदा हैं, वे अब जी नहीं सकते अपने इस देश में। मार दिए जाते हैं, कुत्ते की मौत!”
― महाभोज
― महाभोज
“मत टसुए बहा, हरामज़ादी! मेरे भीतर सुलगती आग इन आँसुओं से ठंडी हो गई तो सबकी तरह ज़नख़ा हो जाऊँगा मैं भी।”
― महाभोज
― महाभोज
“ओस-भीगी दूब पर घूमने से केवल नेत्रों की ज्योति ही नहीं बढ़ती, मन-मस्तिष्क में भी ऐसी तरावट आती है कि सारा दिन आदमी तनाव-मुक्त होकर काम कर सकता है। मन शांत, चित्त प्रफुल्लित!”
― महाभोज
― महाभोज
