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Aughad / औघड़ Quotes

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Aughad / औघड़ Aughad / औघड़ by Nilotpal Mrinal
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“अक्सर ज्यादातर आदमी अपनी जवानी के दौर में समाजवादी, नारीवादी या मार्क्सवादी में से कुछ-न-कुछ जरूर होता है और एक दौर के बाद वो निश्चित रूप से इनमें से कुछ भी नहीं होता है। सिर्फ कमाता-खाता आदमी होता है।”
Nilotpal Mrinal, Aughad
“भाग्य तो बस कच्चा माल है। कर्म ही उसे पकाने वाला ईंधन है। मान लो तुम्हारे घर में चावल है लेकिन अगर उसे चूल्हे पर चढ़ा बनाया नहीं तो बोरी में रखे-रखे चावल में एक दिन घुन लग जाएगा। भाग्य वही चावल है, अगर कर्म का चूल्हा जला के न बनाओ तो कितना भी भाग्य हो, उसमें घुन लग जाएगा।”
Nilotpal Mrinal, Aughad
“नहीं बेटा, तुम्हारी जिज्ञासा सही है, सो इसे भी जान ही लो आज। अभागा तो ईश्वर का भेजा गया वो भरोसेमंद प्राणी है जिसे ईश्वर इस विश्वास के साथ भेजता है कि इसे कुछ भी खैरात देकर मत भेजो, ये सब कुछ खुद हासिल कर लेगा अपने पराक्रम से।” साधु ने एक बार बरामदे से ही बाहर आसमान की तरफ देखते हुए कहा।”
Nilotpal Mrinal, Aughad
“कैसा धर्म है जो पैसा लेकर सेठ के लिए शंख फूँक सकता है लेकिन हरिजन के लिए नहीं।”
Nilotpal Mrinal, Aughad
“पेय पदार्थों में दारू सबसे समाजवादी और समतामूलक चरित्र का होता था। शायद यही कारण है कि दारू हमेशा से मार्क्सवादियों, समाजवादियों में सबसे प्रिय पेय रहा था। यही एक ऐसा पेय था जिसे पीने के बाद आदमी का दिमाग चाहे जितना आसमान उड़े पर शरीर अक्सर जमीन से जुड़ा, जमीन पर लेटा हुआ मिलता था। जमीनी ड्रिंक था दारू। दारू बड़े और छोटे का फर्क मिटा देता था।”
Nilotpal Mrinal, Aughad
“चुनाव लड़ा पर चुनाव में धांधली की शिकायत हो जाने पर चुनाव”
Nilotpal Mrinal, Aughad