“जनता आश्चर्य से देख रही थी। प्रकाश पुंज सिमटकर आकार ग्रहण करने लगा। काषायचीवरधारी भगवान अभयमुद्रा में धरती पर प्रकट हो गये। वे हूबहू म्यूज़ियमों में रखी स्वमूर्तियों जैसे ही थे। भेद केवल इतना था कि सिर पर घुंघराले केश नहीं थे। भिक्खुओं के समान शास्ता का सिर भी मुंडित था।”
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Amritlal Nagar,
चकल्लस