Jaun Elia Quotes
Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar
by
Muntzir Ferozabadi Jaun Elia232 ratings, 4.34 average rating, 18 reviews
Jaun Elia Quotes
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“जौन तुम्हें ये दौर मुबारक दूर ग़म-ओ-आलाम से हो एक लड़की के दिल को दुखाकर अब तो बड़े आराम से हो एक महकती अंगड़ाई के मुस्तक़बिल का ख़ून किया तुमने उसका दिल रखा या उसके दिल का ख़ून किया…”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“है बिखरने को ये महफ़िल-ए-रंग-ओ-बू तुम कहाँ जाओगे हम कहाँ जाएँगे”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“सब मेरे बग़ैर मुतमइन2 हैं मैं सब के बग़ैर जी रहा हूँ क्या है जो बदल गई है दुनिया मैं भी तो बहुत बदल गया हूँ”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“ऐ ख़ुदा जो कहीं नहीं मौजूद क्या लिखा है हमारी क़िस्मत में”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“एक ही फ़न2 तो हमने सीखा है जिससे मिलिए उसे ख़फ़ा कीजे”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“जुर्म के तसव्वुर में गर ये ख़त लिखे तुमने फिर तो मेरी राय में जुर्म ही किए तुमने जुर्म क्यूँ किए जाएँ? ख़त ही क्यूँ लिखे जाएँ?”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“वो किताब-ए-हुस्न वो इल्म ओ अदब की तालीबा1 वो मोहज़्ज़ब2 वो मुअद्दब3 वो मुक़द्दस4 राहिबा5 किस क़दर पैराया6 परवर7 और कितनी सादा-कार8 किस क़दर संजीदा ओ ख़ामोश कितनी बा-वक़ार9 गेसू-ए-पुर-ख़म10 सवाद-ए-दोश11 तक पहुँचे हुए और कुछ बिखरे हुए उलझे हुए सिमटे हुए रंग में उसके अज़ाब-ए-ख़ीरगी12 शामिल नहीं कैफ़-ए-एहसासात13 की अफ़्सुर्दगी14 शामिल नहीं वो मिरे आते ही उसकी नुक़्ता-परवर ख़ामुशी जैसे कोई हूर बन जाए यकायक फ़लसफ़ी15 मुझ पे क्या ख़ुद अपनी फ़ितरत पर भी वो खुलती नहीं ऐसी पुर-असरार16 लड़की मैंने देखी ही नहीं दुख़तरान-ए-शहर की होती है जब महफ़िल कहीं वो तआरुफ़ के लिए आगे कभी बढ़ती नहीं । 1. छात्रा, 2. सभ्य, 3. विनम्र/शिष्ट, 4. पवित्र, 5. नन, 6. पोशाक, 7. रक्षक, 8. साधारण, 9. बुलंद, 10. घुँघराले बाल, 11. सर से कंधे (बीती रात के ज्ञान) 12. हैरत कर देने वाली सज़ा, 13. भावना के परमानंद, 14. निराशा, 15. दार्शनिक, 16. रहस्यमय”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“कौन आया है कोई नहीं आया है पागल तेज़ हवा के झोंके से दरवाज़ा खुला है”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“चाहे तुम मेरी बीनाई खुरच डालो मैं फिर भी अपने ख़्वाब नहीं छोड़ूँगा”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“हम तेरा नाज़2 थे, फिर तेरी ख़ुशी की ख़ातिर करके बेचारा तेरे सामने लाए भी गए”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“वो पागल मस्त है अपनी वफ़ा में मेरी आँखों में आँसू आ रहे हैं”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“ये मत भूलो के ये लम्हात हमको बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“तू मिरी शायरी में है रंग-ए-तराज़ ओ गुल-फ़िशाँ8 तेरी बहार बे-ख़िज़ाँ9 शाम-ब-ख़ैर शब-ब-ख़ैर”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“ज़ख़्म-हा-ज़ख़्म हूँ और कोई नहीं ख़ूँ का निशाँ कौन है वो जो मिरे ख़ून में तर है मुझमें”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“डूबने वालों के दरिया मुझे पायाब6 मिले उस में अब डूब रहा हूँ जो भँवर है मुझमें दर-ओ-दीवार तो बाहर के हैं ढाने वाले चाहे रहता नहीं मैं पर मिरा घर है मुझमें”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“बंद बाहर से मिरी ज़ात का दर है मुझमें मैं नहीं ख़ुद में ये इक आम ख़बर है मुझमें”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“हर लम्हा अपने आप में पाता हूँ कुछ कमी हर लम्हा अपने आप में ईजाद कुछ करूँ”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“अपने यूसुफ़ को जुलेखाँ की तरह तुम भी कभी कुछ हसीनों से मिला दो तो मज़ा आ जाए चैन पड़ता ही नहीं है तुम्हें अब मेरे बग़ैर अब जो तुम मुझको गँवा दो तो मज़ा आ जाए 1.”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हूँ ख़राब मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“जाने मुझसे ये कौन कहता था आप अपना ख़याल तो रखिए”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“मैं भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बस ख़ुद को तबाह कर लिया, और मलाल भी नहीं”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“अब हमारा मकान किसका है हम तो अपने मकाँ के थे ही नहीं”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“तुमने हमारे दिल में बहुत दिन सफ़र किया शर्मिंदा हैं के उसमें बहुत ख़म मिले तुम्हें”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“तुमको जहान-ए-शौक़-ओ-तमन्ना3 में क्या मिला हम भी मिले तो दरहम4 ओ बरहम5 मिले तुम्हें”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“मैं अपने आप में न मिला इसका ग़म नहीं ग़म तो ये है के तुम भी बहुत कम मिले तुम्हें”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
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“जो भी माँगो उधार दूँगा मैं उस गली में दुकान कर ली है मेरा कश्कोल3 कब से ख़ाली था मैंने इसमें शराब भर ली है और तो कुछ नहीं किया मैंने अपनी हालत तबाह कर ली है”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“ज़िंदगी का था अपना ऐश मगर सब की सब इम्तिहान में गुज़री”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
“यूँ तो हम दम-ब-दम ज़मीं पे रहे उम्र सब आसमान में गुज़री”
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
― Jaun Elia: Ek Ajab Ghazab Shayar । जौन एलिया : एक अजब-ग़ज़ब शायर
