Islamic Rajya Ka Bhram Part - I Quotes
Islamic Rajya Ka Bhram Part - I
by
Tarek Fatah11 ratings, 4.64 average rating, 0 reviews
Islamic Rajya Ka Bhram Part - I Quotes
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“संविधान इस तरह से बना है कि बहुमत मुसलमानों को अधिमान्य उपचार प्रदान करता है और एक हिंदू जज को अल्लाह के नाम पर अपने कार्यालय में शपथ लेनी होती है। 24 मार्च, 2007 को न्यायमूर्ति राणा भगवानदास ने, पाकिस्तान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ इन शब्दों से ली, “परमशक्तिशाली अल्लाह मेरी सहायता और मेरा मार्गदर्शन करें, आमीन।” कल्पना कीजिए कि यदि भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका या कनाडा में किसी मुस्लिम जज को बाइबिल या गीता पर शपथ लेने के लिए मजबूर किया गया होता! आप दुनिया भर में सड़कों पर नाराज़ प्रदर्शनकारियों को पाते। जब जस्टिस भगवानदास को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा रहा था तो ये प्रदर्शनकारी कहां थे?”
― Islamic Rajya Ka Bhram
― Islamic Rajya Ka Bhram
“अपनी किताब “अल–फ़ितन वा अशरात अस–साह” में नूइम इब्न हम्माद अल–मरवाजी ने एक वृतांत बयान किया है, जिसके मुताबिक़ ‘ईसा (जीसस)’ के अवतरण से पहले ग़ज़वा–ए–हिंद होगा। इस वृतांत में कहा गया है : “मेरे मुल्क के लोग भारत को फ़तह करेंगे और अल्लाह उन्हें इस क़दर जीत बख्शेगा कि वे भारत के बादशाहों को हथकड़ियां पहनाकर लाएंगे और अल्लाह उनके गुनाहों के लिए उन्हें माफ़ कर देगा और वे अश–शाम यानी लेवंत (ग्रेटर सीरिया) लौट आएंगे और वे वहां ईसा को पाएंगे।’’ इन इस्लामिक व्याख्यानों को आईएसआईएस जिस संजीदगी से लेता है, वही उसे उन दूसरे इस्लामिक देशों से अलग करती है, जिनके बारे में इस किताब में चर्चा की गई है। यानी वे देश, जिन पर ऐसे लोगों का शासन है, जिनका पहला सरोकार हुकूमत पर अपनी भ्रष्ट पकड़ बनाए रखते हुए खुद को मालामाल करना है और जो अपने नापाक मंसूबों को छिपाने के लिए ही इस्लाम का नाम लेते हैं।”
― Islamic Rajya Ka Bhram
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