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पाजी नज्में Quotes

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पाजी नज्में पाजी नज्में by गुलज़ार
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पाजी नज्में Quotes Showing 1-3 of 3
“मैं जितनी भी ज़बानें बोल सकता हूँ वो सारी आज़माई हैं... ‘ख़ुदा’ ने एक भी समझी नहीं अब तक, न वो गर्दन हिलाता है, न वो हंकारा ही देता है!”
गुलज़ार, पाजी नज्में
“लेकिन मुस्कराने की शर्त पक्की है मुस्कराहट मुआवज़ा है मेरा मुझ को इतने से काम पे रख लो!”
गुलज़ार, पाजी नज्में
“मुझको इतने से काम पे रख लो जब भी सीने में झूलता लॉकेट उलटा हो जाए तो मैं हाथों से सीधा करता रहूँ उसको”
गुलज़ार, पाजी नज्में