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आखिरी आवाज़ Quotes

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आखिरी आवाज़ आखिरी आवाज़ by रांगेय राघव
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“बरसात की नदी जब उमंग बहती है, तब वह एक किनारे से नहीं खेलती, दोनों किनारों से खेलती है और दोनों की जड़ें खोदती हुई उनकी गीली मिट्टी को निगलती हुई, गंदली होती हुई, मस्ती में झूमती, हुमस-भरी आगे बढ़ती चली जाती है।”
रांगेय राघव, आखिरी आवाज़