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आखिरी आवाज़ Quotes
आखिरी आवाज़
by
रांगेय राघव5 ratings, 4.20 average rating, 1 review
आखिरी आवाज़ Quotes
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“बरसात की नदी जब उमंग बहती है, तब वह एक किनारे से नहीं खेलती, दोनों किनारों से खेलती है और दोनों की जड़ें खोदती हुई उनकी गीली मिट्टी को निगलती हुई, गंदली होती हुई, मस्ती में झूमती, हुमस-भरी आगे बढ़ती चली जाती है।”
― आखिरी आवाज़
― आखिरी आवाज़
