Osho Pravachan par Aadharit Quotes
Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
by
Anand Satyarthi93 ratings, 4.30 average rating, 5 reviews
Osho Pravachan par Aadharit Quotes
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“अतीत के बारे में चिन्ता क्यों करते हो? उसको भूल जाओ। अब तुम इस तरह से जीना शुरू करो जैसे तुम्हें जीना आता ही न हो। तुम्हें सिखाने वाला कोई नहीं है और न ही कोई मार्गदर्शन ही तुम्हारे पास है। कोई ऐसी पुस्तक नहीं है जिसमें लिखा हो ऐसा-कैसे किया जाए, वैसा किस तरह करें। तुम जैसे एक द्वीप में अकेले हो। वहां सब कुछ उपलब्ध है। तुम्हारे अंदर बुद्धि है, समझ है, तुम्हारे अंदर सोचने-समझने की शक्ति है। अब तुम अपना जीवन शुरू करो।”
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
“शुभ कार्य के लिए मुहूर्त निकलवाते हैं
और
अशुभ कार्य (काम, क्रोध, लोभ इत्यादि) तत्क्षण करते हैं।
सोचे समझे महामंत्र का उपयोग कब करना है।”
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
और
अशुभ कार्य (काम, क्रोध, लोभ इत्यादि) तत्क्षण करते हैं।
सोचे समझे महामंत्र का उपयोग कब करना है।”
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
“जीवन में एक सातत्य, एक संकल्प जो चूना है करने के लिए उसे करते रहने का धीरज, प्रतीक्षा सहिष्णुता! आज ही फल तो नहीं आ जाएगा। बीज बोए हैं तो वक्त लगेगा प्रतीक्षा करनी पड़ेगी, मौसम आएगा ठीक अनुकूल तब बीज अंकुरित होंगे, फिर वृक्ष बड़े होंगे, वर्षों लगेंगे तब कहीं फल होंगे - प्रतीक्षा करनी होगी।”
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
“अभी तो ऐसा है कि बहुत खंड हैं, कुछ कहते कुछ सोचते, कुछ करते, कल कुछ करते, परसों कुछ करने लगते। इधर एक मकान उठाना शुरू किया, फिर आधा छोड़ दिया, फिर दूसरा मकान बनाने लगे। इधर एक कुआं खोदा दो हाथ फिर छोड़ दिया फिर दूसरा कुआं खोदने लगे। ऐसे करते तो तुम बहुत हो लेकिन फल हाथ नहीं आता। फल आने के लिए सातत्य चाहिए।”
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
“संन्यास का अर्थ है जीवन को एक काम की भांति नहीं वरन् एक खेल की भांति जीना। जीवन नाटक से ज्यादा न रह जाए कि चिंता को जन्म दे सके। दुःख हो या सुख, पीड़ा हो संताप हो, जन्म हो या मृत्यु संन्यास का अर्थ है इतनी समता में जीना (हर स्थिति में) कि भीतर कोई चोट न पहुंचे।”
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
― Osho Pravachan par Aadharit : Jeevan Jeene Ki Kala: ओशो प्रवचनों पर आधारित : जीवन जीने की कला
