Shrimad Bhagavadgita Quotes

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Shrimad Bhagavadgita (Hindi Edition) Shrimad Bhagavadgita by Anonymous
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“वास्तविक त्याग ‘कर्म’ का त्याग नहीं, वह तो हो ही नहीं सकता, वास्तविक त्याग ‘कामना’ का त्याग है।”
Anonymous, Shrimad Bhagavadgita
“किसी भी देहधारी के लिए कर्मों का पूर्ण त्याग संभव नहीं है, परन्तु जो कर्म के फल को त्याग देता है, वही त्यागी कहलाता है (सिर्फ भगवा पहनकर सब काम छोड़ देना और अपने को संन्यासी कहते फिरना त्यागी का लक्षण नहीं है)॥ [18.11]”
Anonymous, Shrimad Bhagavadgita
“हे धनंजय! योगस्थ होकर कर्म-योग में स्थित होकर, कर्म के फल की आसक्ति को छोड़कर, कर्म की सिद्धि या असिद्धि दोनों अवस्थाओं में समता की मनोवृत्ति को धारण करके कर्म कर। कर्म-फल मिलने या न मिलने दोनों अवस्थाओं में मन की समअवस्था रहे – इसी को योग कहते हैं॥”
Anonymous, Shrimad Bhagavadgita