भारत विभाजन Quotes
भारत विभाजन
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भारत विभाजन Quotes
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“हमसे पूछते हैं कि यदि वे हार गए और दुश्मन यहाँ आ गए तो हमारा क्या होगा? वे डर रहे हैं और इस प्रश्न का उत्तर देना मुश्किल है। यद्यपि वे दो सौ वर्षों तक यहाँ रहे हैं, फिर भी, हमें दुःख है कि वे हमसे यह प्रश्न पूछ रहे हैं। हम कहते हैं कि ‘‘आप चिंता न करें। दो सौ वर्षों तक यहाँ रहने के बाद भी यदि आपको यह प्रश्न हमसे पूछना पड़ रहा है तो यातायात के प्रथम उपलब्ध साधन से आप यहाँ से चले जाएँ। हम अपना मामला सुलझा लेंगे।... हमें जो होना है, उसे होने दीजिए; किंतु आप अपने हृदय से पूछिए कि जब आप दो सौ वर्षों बाद भारत खो देंगे तो आपका क्या होगा? आपकी वास्तविक पीड़ा यही है।”
― भारत विभाजन
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“मेरी धारणा है कि हम लोगों को समाचार-पत्रों की रपटों की उपेक्षा कर देनी चाहिए। सर सिकंदर को मौलाना अबुल कलाम आजाद को लिखना चाहिए था, जिनसे वह पिछली बार दिल्ली में मिले थे अथवा गांधीजी को पत्र लिखना चाहिए था, जिनके पास उनकी पहुँच सुगमता से होती है। मेरे विचार से, हम लोगों को अब कोई और पहल नहीं करनी चाहिए। आपके पत्र के जवाब में श्री जिन्ना के पिछले उत्तर से अब आगे किसी भी पहल का पूरा दायित्व उन्हीं का बनता है। मैं समझता हूँ कि लगातार प्रस्ताव देकर हम अपना केस खराब कर रहे हैं। परंतु इस विषय में मौलाना साहब की सलाह अंतिम होनी चाहिए।”
― भारत विभाजन
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“भी”
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“सरदार पटेल ने हिंदू महासभा और आर.एस.एस. को चेतावनी दी कि ‘‘उन्हें यह समझना चाहिए कि भारत सरकार देश की शांति और स्थिरता पर कोई भी आक्रमण बरदाश्त नहीं कर सकती।’’ उन्होंने कहा कि प्रत्येक देशभक्त मुसलमान को अपने भाई की तरह समझा जाना चाहिए और किसी ने भी यह सोचा कि वह मुसलमानों को कष्ट देने के लिए स्वतंत्र है तो यह स्वतंत्रता उचित नहीं है। (प्रलेख”
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“एक ही देश में दो राष्ट्रों के विचार को हास्यास्पद बताते हुए सरदार ने कहा कि इसका अर्थ यह होगा कि पिता एक राष्ट्र का होगा और उसके बच्चे दूसरे राष्ट्र के।’’ ‘‘इसमें मैं यह भी जोड़ना चाहूँगा कि कुछ लोग तो ‘नो मैंस लैंड’ के भी होंगे—यदि पिता एक राष्ट्र का हो और माता दूसरे राष्ट्र की!”
― भारत विभाजन
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“हिंसा और तीव्रता के बावजूद ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ सफल नहीं हुआ। परंतु यह आंदोलन यह प्रदर्शित करने में सफल रहा कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए पूरे देश में लोग सबकुछ बलिदान करने”
― भारत विभाजन
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“भारत छोड़ो का नारा तभी प्रभावी होगा जब 40 करोड़ भारतीय 1 लाख अंग्रेजों से भारत छोड़ने के लिए कहेंगे।”
― भारत विभाजन
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“परित्याग करना है।’’ (प्रलेख-36) उन्होंने जोर दिया कि अहिंसा एक सीमित क्षेत्र तक ठीक है, किंतु यह आंतरिक या बाह्य आक्रमण का सामना करने के लिए उचित नहीं है।”
― भारत विभाजन
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“भावनगर में कुछ मुसलमानों द्वारा उन पर आक्रमण किए जाने के बावजूद सरदार पटेल ने राजेंद्र बाबू से कहा कि उन आर्यसमाजियों पर कठोर काररवाई की जानी चाहिए, जो शोलापुर में दो मुसलमानों की हत्या के जिम्मेदार”
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“सरदार पटेल ने रास (Ras) के लोगों को आनेवाले प्रांतीय महासभा (प्रोविंशियल असेंबली) चुनावों के महत्त्व को समझाने का प्रयास किया और उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने के लिए प्रेरित किया, ‘‘लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है, लेकिन इसका तरीका बदल दिया गया है। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कभी खत्म नहीं होता।’’ इस”
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“सरदार पटेल की अध्यक्षता में 2 अप्रैल, 1931 को कराची में इंडियन नेशनल कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति के द्वारा विभिन्न स्तरों पर विचार किए जाने के बाद तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया।”
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“एक और तथ्य जिसे दृढ़ता से, किंतु सरकारी सलाहकारों द्वारा निराधार ही प्रस्तुत किया गया, वह यह था कि संधि में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए तब तक व्यवस्था नहीं हो सकती जब तक कि इसमें उनके प्रतिनिधिस्वरूप ब्रिटिश हस्तक्षेप की आवश्यक व्यवस्था न कर ली जाए। कांग्रेस और मुसलिम लीग दोनों ने ही इन प्रस्तावों को अस्वीकृत कर दिया। कांग्रेस ने महसूस किया कि क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों से ‘‘कांग्रेस और सरकार के बीच की दूरियाँ बढ़ेंगी और जिसे वे मानते थे कि शासन त्यागने की अपनी असम्मति को अंततः उन्होंने अभिव्यक्त किया था।’’ कांग्रेस ने यथार्थतः भारतीय हाथों में तत्काल शासन हस्तांतरित करने के लिए आग्रह किया। यानी पूर्ण शक्ति-संपन्न एक मंत्रिमंडलीय सरकार और (क्रिप्स के) प्रस्तावों को अस्वीकृत कर दिया।3”
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“आप हमारे कंधों पर पिछले डेढ़ सौ सालों से सवारी करते चले आ रहे हैं, अब उतर जाइए। वे कहते हैं कि यदि वे चले जाएँ तो हमारा क्या होगा? आप हमसे यह प्रश्न दो सौ वर्षों तक शासन करने के बाद पूछ रहे हैं! फिर आपने इतने वर्षों तक क्या किया? इससे मुझे एक झगड़े का प्रसंग याद आता है—एक मकान मालिक से चौकीदार पूछता है कि ‘क्या होगा, जब वह चला जाएगा?’ ‘मैं सुरक्षा करना सीख लूँगा।’ लेकिन यह चौकीदार काम छोड़ता नहीं है और हम लोगों को बार-बार धमकाता रहता है।’’ (प्रलेख-33)”
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“सरदार पटेल ने कहा था कि ‘‘हमें विभाजन के लिए सहमत होना पड़ा...तमाम संशयों और दुःखों के बाद। किंतु मैंने महसूस किया कि यदि मैं विभाजन को स्वीकार नहीं करता हूँ तो भारत अनेक समुदायों में बँट जाएगा और पूर्णतः बरबाद हो जाएगा। विभाजन के बाद भी 75 प्रतिशत जनसंख्या इस ओर रह जाएगी, जिन्हें हमें ऊपर उठाना है।’’ यहाँ तक कि गांधीजी ने भी, जिनसे अनेक वर्षों तक सरदार पूर्णतः सहमत थे, महसूस किया कि यद्यपि वे इस निर्णय से सहमत नहीं हैं, ‘‘किंतु उन्होंने मुझसे (सरदार से) कहा कि यदि मेरा हृदय मेरी धारणा को ठीक समझता है तो मैं आगे बढ़ सकता हूँ।”
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