Suspected Poems Quotes

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Suspected Poems Suspected Poems by Gulzar
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“सत्तर साल हुए हैं, मैं इस ट्रेफ़िक जैम में फँसा हुआ हूँ न्यु देहली की पार्लियामेंट रोड पे होड़ लगी है दायें तरफ़ की एक क़तार में धक्कम पेल लगी है कब से बायें तरफ़ कुछ और क़तारें उलझ गई हैं देखो तो बन्दे पर बन्दा चढ़ा हुआ है सीटें बांट रहा है कोई, कुर्सियाँ खींच रहा है न आगे बढ़ता है कोई, न पीछे हटता है ट्रेफ़िक जैम में फसाँ हुआ हूँ सत्तर साल हुए हैं!”
गुलज़ार, Suspected Poems
“डस्टबिन’ में फेंके हुये इक बच्चे को इक कुतिया ने तीन दिन तक दूध पिला कर ज़िन्दा रखा फिर लोग ले गये . . . दिन रात वहीं, पंजों से अब वो कूड़ा कुरेदा करती है!”
गुलज़ार, Suspected Poems
“अख़बार उठाया तो कुछ छोटी-छोटी ख़बरें, गोद में आन गिरीं!”
गुलज़ार, Suspected Poems
“ताज़ा ख़बरें, जो ताज़ा हैं, आज के लिये हैं हरी-हरी सब्ज़ ताज़ा तर्कारियां हैं सारी ये आज ही इस्तमाल कर के, भूल जायें!”
गुलज़ार, Suspected Poems