राजसूय यज्ञ Quotes
राजसूय यज्ञ
by
Manu Sharma43 ratings, 4.58 average rating, 2 reviews
राजसूय यज्ञ Quotes
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“मस्तिष्क में विवेक और क्रोध का एक ही कक्ष होता है। जब विवेक आता है तब क्रोध वहाँ से भाग जाता है और जब क्रोध आता है तो विवेक नहीं ठहरता।”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“जब क्रोध असमर्थ हो जाता है तब वह गालियों के व्यर्थ बाण छोड़ने लगता है।”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“अमूर्त को मूर्त में देखना ही तो कला है, अग्रजश्रेष्ठ!”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“खाना-पीना और परिवार के साथ रहना, यह तो पशु प्रवृत्ति है। मनुष्य तो हमेशा दूसरों के लिए जीता है।”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“ईर्ष्या का विष-वृक्ष अपनत्व की धरती पर ही उगता है।”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“नारी का अहं तो पानी का बुलबुला है। अनुकूल हवा मिली तो लहरों के सिर चढ़ा और जरा सी स्थिति गड़बड़ाई तो फूटकर बिखरा।”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“शासन के लिए अनुशासन की आवश्यकता है।”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“वियोग में वही चंद्रमा जलाता है और संयोग में शीतल लगता है। चंद्रमा वही है, मन बदलते ही वह भी बदला नजर आता”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
“जब चंद्रमा को लोग पाते नहीं तब चाँदनी को ही कोसते हैं।”
― राजसूय यज्ञ
― राजसूय यज्ञ
