नीलाम्बरा Quotes

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नीलाम्बरा नीलाम्बरा by Neelambra
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नीलाम्बरा Quotes Showing 1-19 of 19
“मैं मिटूँ प्रिय में मिटा ज्यों तप्त सिकता में सलिल-कण, सजनि मधुर निजत्व दे कैसे मिलूँ अभिमानिनी मैं!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“सच है कण का पार न पाया, बन बिगड़े असंख्य संसार; पर न समझना देव हमारी— लघुता है जीवन की हार!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“दिन को कनक राशि पहनाता, विधु को चाँदी-सा परिधान;”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“सुख-दुख की बुदबुद्-सी लड़ियाँ बन बन उसमें मिट जातीं, बूंद बूंद होकर भरती वह भरकर छलक-छलक जातीं!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“जो न होकर भी बना सीमा क्षितिज वह रिक्त हूँ मैं, विरति में भी चिरविरति की बन गई अनुरक्ति हूँ मैं”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“नाश भी हूँ मैं अनन्त विकास का क्रम भी, त्याग का दिन भी चरम आसक्ति का तम भी; तार भी आघात भी झंकार की गति भी, पात्र भी मधु भी मधुप भी मधुर विस्मृति भी; अधर भी हूँ और स्मित की चाँदनी भी हूँ!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“दूर तुमसे हूँ अखण्ड सुहागिनी भी हूँ!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“सुख-दुख मंजरियों के अंकुर!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“सजल लोचन, तरल चितवन,”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“मेघ सी घिर झर चली मैं!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“सुख से विरक्त दुख में समान!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“चातकी हूँ मैं किसी करुणा-भरे घन की!”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“बिंध गया अजान आज किसका मृदु-कठिन तीर?”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“दीपकमय कर डाला जब जलकर पतंग ने जीवन, सीखा बालक मेघों ने नभ के आँगन में रोदन।”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“कितनी बीती पतझारें कितने मधु के दिन आये”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“अमरता है जीवन का हास मृत्यु जीवन का चरम विकास।”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“अछूता ले अपना मकरन्द, ढूँढ़ पाया कैसे यह देश;”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“उषा के छू आरक्त कपोल किलक पड़ता तेरा उन्माद,”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा
“जानते हो यह अभिनव प्यार किसी दिन होगा कारागार?”
Mahadevi Verma, नीलाम्बरा