सम्पूर्ण कहानियाँ Quotes

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सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2 सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2 by Shivani
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“समृद्ध वर्तमान अतीत के दारिद्र्‌य को भले ही पीछे धकेल दे, अतीत का कलंक, बिल्ली की भाँति सहज में नहीं मरता।”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“प्रवंचना की अन्तिम नियति पराजय ही होती है,”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“महाराष्ट्री चितपावनी ब्राह्मणों की-सी हरी आँखें।”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“आँखों में किसी को कुछ न समझनेवाली रस्सी की-सी ऐंठ थी”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“सात्विक सौन्दर्य ने धर्म, जाति और रूढ़ियों की उलझी गाँठें क्षण-भर में सुलझाकर रख दीं।”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“मंगोल कटाक्षों”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“आँखों का अंकुश लगाए”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“निर्भीक दृष्टि में कुछ अजीब मोहिनी”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“पेंग्विन पक्षी अपने बच्चे को बड़ी निर्ममता से चट्‌टान से धकेलकर उड़ना सिखाता है।”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2
“पुण्य-यज्ञ की पावन आहुति में आलोचना के लिए स्थान नहीं रहता।”
Shivani, सम्पूर्ण कहानियाँ: शिवानी - Vol. 1 and 2