Citadel of Love Quotes

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Citadel of Love Citadel of Love by Pratibha Ray
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Citadel of Love Quotes Showing 1-12 of 12
“कोणार्क प्रेम का मंदिर है। त्याग की पूजावेदी है। उत्सर्ग एवं पवित्रता का अमित स्मृति सौध है। एकाग्र साधना का पुण्यपीठ है।” चार्ल्स”
Pratibha Rai, Konark
“बचाना ईश्वर का ही काम है।”
Pratibha Rai, Konark
“एकाग्रता, उत्सर्ग एवं त्याग की बात जो नहीं जानता वह कोणार्क से सौ कोस दूर है।”
Pratibha Rai, Konark
“भगवान बल दे तुझे, कभी न हारना।”
Pratibha Rai, Konark
“अचानक बिज़ली की झलक में कोणार्क आकाश के पर्दे पर उद्‌भासित हो उठा।”
Pratibha Rai, Konark
“आम, कटहल के बेशुमार पेड़। पुन्नाग का बगीचा। जामुन, तेंदु, अमरूद आदि के पेड़। काठचंपा, चंपा, कनेर, मंदार, हेना, जुही, मल्ली, मालती आदि का विराट बगीचा।”
Pratibha Rai, Konark
“प्राचीप्रभा उस कोणार्क कन्या की तरह लावण्यमयी, छंदमयी, लास्यमयी है। अपने जीवन के गुरुभार को कभी औरों पर लाद कर नहीं जाती। प्राची नदी की तरह प्राचीप्रभा अपने मधुर स्वभाव के स्वच्छ सलिल के स्पर्श से सब को संजीवित करते जाने का प्रण किये है, प्राचीप्रभा अनंत आशा और अपार्थिव आनंद की प्रतिमूर्ति है। यहां नैराश्य या वेदना का कोई स्पर्श नहीं।”
Pratibha Rai, Konark
“समय सम्मोहित हो लौट जाता है—वापस। सदियों पुराना अतीत जीवन्यास पाकर रात के अंधेरे की चिरौरी करता है। यह सब अलौकिक लगता है, मगर सच है। शतायु विष्णु महाराणा इसे एकदम सच बताते हैं।”
Pratibha Rai, Konark
“इस सरल और भोले विश्वास के कारण ही तो चित्रा इतनी सुन्दर है। विश्वास का इतना सुन्दर रूप चार्ल्स ने अपने देश में कभी नहीं देखा। वहां अविश्वास और सन्देह मां के पेट से पैदा होते हैं। और इस विश्वास के कारण ही चार्ल्स कई बार कह उठता—इडिया इज़ ग्रेट। इंडिया इज़ ग्रेट।”
Pratibha Rai, Konark
“चित्रा वहीं कोणार्क के पास फूल बेचा करती है। ताजा, सुगन्ध भरे, रसीले। अपनी डलिया में रखे फूलों से भी वह ताजा और निष्पाप दिखती। उसकी डलिया के फूल सुबह रखने पर शाम तक मुरझाते नहीं।”
Pratibha Rai, Konark
“जीवन का बोझ भुलाने के लिए व्यस्त होना जरुरी है। इंडिया मुझे बाकी जीवन भर व्यस्त रख सकेगा। औरों के जीवन का बोझ उठाते-उठाते अपने जीवन का बोझ आदमी भुला देता है।”
Pratibha Rai, Konark
“तीर्थयात्रा हिन्दू धर्म का प्रधान अंग है। हिन्दू यात्री एक अखंड विश्वास के बल पर हजारों कोस चला जाता है।”
Pratibha Rai, Konark