काव्यांजलि Quotes

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काव्यांजलि काव्यांजलि by Gopaldas "Neeraj"
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काव्यांजलि Quotes Showing 1-30 of 70
“जले उमर-भर फिर भी जिनकी अर्थी उठी अँधेरे में ही,”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“दिखे नहीं फिर भी रहे, ख़ुशबू जैसे साथ। वैसे ही यादें तेरी, संग चलें दिन-रात।।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“न जन्म कुछ न मृत्यु कुछ बस इतनी ही तो बात है किसी की आँख खुल गई किसी को नींद आ गई।।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“चाह तन-मन को गुनहगार बना देती है बाग़ के बाग़ को बीमार बना देती है भूखे लोगों को देशभक्ति सिखाने वालों भूख इन्सान को गद्दार बना देती है।।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“कविता तू जिसे कहता वो बेटी है तेरी चौराहे पे लाकर उसे नीलाम न कर।।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“झूठी मुर्दार रूढ़ियों की हिफाज़त के लिए मारना तुझको पड़ा है शहीद मन अपना!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“पूँजी-मसनद के सहारे पे टिकी दुनिया में प्यार बिकता है गली-गाँव खिलौने की तरह होता ईमान है नीलाम बर्तनों की तरह”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“और बैठा हूँ मैं हाथों में लिए कुछ तिनके जबकि नस-नस मेरी रस्सी की तरह ऐंठी है।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“आँधी के थपेड़े से मोमबत्ती की काँपती लौ न किसी तौर भी जल पाती है!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“सूरज के चले जाने पर जैसे फूलों की हँसी सूख के झर जाती है”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“कैद है तेरी कलाई भी किसी कँगन में तू भी सोने की चमकती हुई झंकार ही है!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“और तब तक के लिए अपने कारखानों को, खूब समझा दे कि उगले न ज़हर धरती पर यूँ ही पीती न रहेगी मेरी धरती ये धुआँ यू ही रोती न रहेगी नये भारत की नज़र!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“अब वह बचपन न रहा अब वह खिलौने न रहे।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“अब वे रातें न रहीं, अब वे बिछौने न रहे,”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“हम नहीं काज़ी-पुरोहित, हम नहीं रामू-रहीमन भेद से आगे खड़े हम, फ़र्क़ से अनजान हैं हम प्यार है मज़हब हमारा और बस इन्सान हैं हम!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“केवल पेट और रोटी की यहाँ कहानी होती है,”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“है संसार अरे धनियों का दुखियों का संसार नहीं,”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“एक बार मरकर ही मैं युग-युग तक जीने आता हूँ, हुंकारें सुन हिल जायेंगी भू, नभ की तसवीरें, ताज हिलेंगे, राज हिलेंगे, तख़्तों की तक़दीरें, हिल जायेंगे मंदिर-मस्जिद पराधीन जंज़ीरें, किन्तु रहेंगी अमिट लहू से मेरे बनी लकीरें, आज विश्व के वैभव की मैं ईंट हिलाने आया हूँ। मैं विद्रोही हूँ, जग में विद्रोह कराने आया हूँ।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“एक क्षुद्र - सा फूल रूप सारे उपवन का? एक बूँद ही तो समुद्र की गहराई है,”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“पर जब तक लालसा समर की शेष रक्त में, हार - हार यह नहीं, विजय ही अमर अभय है। यदि मन अजित-अजेय, पराजय भी फिर जय है।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“मैं तो लेकर कलम उठूँ तुम लेकर नई मशाल उठो साज़िश का ये नगर ध्वस्त हो हँसिये ओर कुदाल उठो लोकतंत्र”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“मत पुजारी बन स्वयं भगवान बनकर जी!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“फागुन बिना चुनरिया भींगे सावन बिना भवन भींगे”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“आँसू के बाग़ों में जिसने जाकर बोये गीत - रुबाई, सिक्कों की धुन पर अब नाचे उसके ही सुर की शहनाई।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“गीत हमारे ही गुलाब थे अश्क हमारे ही शबनम थे है यश का पैबन्द मगर अब जीवन की मैली चादर में।”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“आह श्यामल बाहुओं की घाटियों के पार,”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“चुन रक्खा है मुझे साँस ने मिट्टी की दीवार में!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“पकी निबौरी, हरे हो गये पीले पत्ते आम के”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“कैसे किसके गले डाल दूँ माला अपने हाथ से मैं तो अपनी नहीं, धरोहर हूँ तेरी संसार में!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि
“अधिकार जब अधिकार पर शासन करे, तब छीनना अधिकार ही कर्तव्य है, संहार ही हो जब सृजन के नाम पर, तब सृजन का संहार ही भवितव्य है, बस ग़रज़ यह गिरते हुए इन्सान को, हर तरह हर विधि से उठाना धर्म है!”
Gopaldas "Neeraj", काव्यांजलि

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