Sacchi Ramayan / सच्ची रामायण Quotes
Sacchi Ramayan / सच्ची रामायण
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Sacchi Ramayan / सच्ची रामायण Quotes
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“कला और विज्ञान की उन्नति को बढ़ावा देने के लिए सौ फूलों को खिलने तथा सौ विचारधाराओं के बीच वाद-विवाद का अवसर देने की नीति उपयोगी होती है।”
― Sachchi Ramayan
― Sachchi Ramayan
“जो अनुभव कभी खतरे को वास्तविक सिद्ध करते थे, अब नगण्य हो चुके हैं; और जो खतरे कभी बहुत निकट महसूस होते थे, अब टल गए हैं। सामान्य नियमों के अनुसार ईश्वर-निन्दा और अधर्म जैसा कुछ भी नहीं होता...जो हमें अपने समय में उस अनुभव के अनुसार विशेष परिस्थितियों में उन्हें लागू करने के अलग-अलग तरीकों को अपनाने से रोक सके।”
― Sachchi Ramayan
― Sachchi Ramayan
“एक दिशा में आगे बढ़ने वाला विचार खुद को नए अनुभवों के आधार पर दूसरी दिशा में मुड़ने से नहीं रोकता, न ही परिस्थितियों के फिर से बदलने पर वह अपनी उत्तरवर्ती पीढ़ियों को बाँधे रखता है।”
― Sachchi Ramayan
― Sachchi Ramayan
“समाज को खतरे में डालने वाले शब्द तथा कृत्य समय-समय पर अनुपात में भिन्न होते हैं। क्योंकि, वास्तव में समाज स्थिर या असुरक्षित होता है, या उसके विवेकशील सदस्य यह मानते हैं कि उस पर हमला हो सकता है। वर्तमान समय में ऐसी सभाओं तथा जुलूसों को कानूनी तौर पर वैध माना जाता है, जिन्हें डेढ़ सौ साल पहले राजद्रोही माना जाता था और ऐसा इसलिए नहीं है कि कानून कमजोर पड़ गया है या बदल गया है; बल्कि इसलिए कि समय के बदलने से समाज पहले से ज्यादा सशक्त हुआ है।”
― Sachchi Ramayan
― Sachchi Ramayan
“सत्य की उत्तम परीक्षा तब होती है, जब मनुष्य की विचार-शक्ति को दूसरों के समक्ष रखा जा सके और उनके विचारों की अभिव्यक्ति स्वीकार की जा सके और जब उन्हें यह अहसास हो कि सत्य ही वह एकमात्र आधार है, जिस पर वे अपनी इच्छाओं को निरापद रूप से पूरा कर सकते हैं। हर हाल में वही हमारे संविधान का सिद्धान्त”
― Sachchi Ramayan
― Sachchi Ramayan
“यदि एक व्यक्ति को छोड़कर सम्पूर्ण मानव जाति का एक मत हो और केवल उस एक व्यक्ति का विरोधी मत हो, तो भी मानवजाति द्वारा उसको चुप करा देना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन, यदि उस अकेले व्यक्ति में मानव जाति को मौन करने की शक्ति हो तो यह न्यायसंगत होगा।(अपने निबन्ध ‘ऑन लिबर्टी’ में मिल्स, पृ. 19-20 : थिंकर लाइब्रेरी सं., वाट्स)” “तुम जो कहते हो, मैं उसे अस्वीकार करता हूँ, परन्तु तुम्हारे यह कहने के अधिकार की रक्षा, मैं अन्तिम श्वास तक करूँगा। (वाल्तेयर, एस.जी. टालंटयर, द फ्रेंड्स ऑफ वाल्तेयर, 1907)”
― Sachchi Ramayan
― Sachchi Ramayan
“किथाई सुरा : किथाई सुरा ऐसी शराब को कहा जाता है जो उबालकर बनाई जाती है। मैरेय : यह मसालों से तैयार होने वाली शराब है। मद्य : बेहोश तथा मतवाला बना देने वाला पेय पदार्थ। मंधा : यह साधारण मादक पेय पदार्थ था, जिसमें ज्यादा नशा नहीं होता था। यह पिथ मंध भी कहलाता था। ज्यादा नशा नहीं होने के कारण सब इसे पीना पसन्द करते थे। सुराबनम : यह किथाई सुरा से भिन्न है। किथाई सुरा कृत्रिम विधि से बनाई जाती थी, जबकि सुराबनम प्राकृतिक मादक पेय है। यह आम लोगों का पेय था और इसे निथारने की प्रक्रिया से तैयार किया जाता था। पुराणों में इस बारे में बहुत कुछ कहा गया है। सिधु : यह गुड़ के शीरे से बनाई जाती थी। सौविराक : यह निचले दर्जे का पेय था। वारुणी : उन दिनों प्रयोग होने वाले पेय पदार्थों में यह सबसे कड़ी (नशीली) थी। इसे पीते ही लोग लड़खड़ाने लगते थे।”
― Sachchi Ramayan
― Sachchi Ramayan
