Mahuacharit Quotes
Mahuacharit
by
Kashinath Singh106 ratings, 3.84 average rating, 9 reviews
Mahuacharit Quotes
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“तुम इनमें फड़फड़ा सकती हो, उड़ नहीं सकतीं । जिन दीवारों में तुम घिरी हो, उन्हें सिर्फ हथौड़े ही तोड़ सकते हैं । और यह तो सिर्फ सेंध है ।”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“दस साल में वसुधा भूमंडल हो जाती है और प्यार कूड़ेदान का कचरा । उसकी जगह डस्टबिन हो जाती है, दिल नहीं ।”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“मेरी आँखों से चिमटी में फँसी हुई मांस की वह गुलाबी गोली हट ही नहीं रही थी जिसे ‘फीटस’ कहते हुए डाक्टर ने गर्भ के प्रमाण के रूप में मुझे दिखाया था । मैं जब भी उस पर नजर गड़ाती, वह मुझे घूरती हुई एक ही प्रश्न करती–बार–बार : अगर मैं तुम दोनों के चरम सुख का वरदान थी तो इसमें मेरी क्या गलती थी ?”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“ठीक से समझ में आ जाने के बाद कोई अपने को छिपाना भी चाहे तो पूरी तरह नहीं छिपा सकता । वह आपके सामने हो या न हो, कहाँ क्या कर रहा होगा, क्या सोच रहा होगा–उसके बिना बताए हमें आभास हो जाता है ।”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“दिल और दलदल एक जैसे होते हैं । दलदल में पाँव फँस जाय तो बाहर आना मुश्किल, दिल में कोई बात धँस जाय तो निकलनी मुश्किल”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“सच पूछिए तो चिन्ता जीने का सबसे बड़ा सबब है । जब तक चिन्ता है तब तक जिन्दगी । चिन्ता खतम, जिन्दगी खतम”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“मुझे भी एक ‘कोई’ की सख्त जरूरत महसूस होने लगी थी जो इस बदलाव को झुठला दे और साबित कर दे कि मैं औरत हूँ और किसी भी पुरुष को मर्द बनाने की क्षमता रखती हूँ ।”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“यह मानी हुई बात है कि कोई लड़की चाहे जितनी सुन्दर हो, अपने सौन्दर्य को लेकर हमेशा सन्देह में रहती है कि वह जरूरत से ज्यादा लम्बी और दुबली है, छातियाँ छोटी हैं, कि कमर मोटी है, कि जाँघें भरी–भरी नहीं हैं, कि बाहें सूखी लकड़ी जैसी हैं! वह चाहती है कि कोई हो जो सिर्फ इतना भर कह दे कि नहीं, तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की मैंने नहीं देखी ।”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“पति–पत्नी नमक–पानी नहीं है– कि इस तरह घुल–मिल जायँ कि न पानी पानी रहे, न नमक नमक उन दोनों की अपनी–अपनी प्राइवेसी होनी चाहिए और अपनी अपनी जिन्दगी ।”
― Mahuacharit
― Mahuacharit
“हम हर चीज के बँटवारे सह लेते हैं लेकिन देह का बँटवारा नहीं सहा जाता । ऐसा क्यों है ? ऐसा क्या है देह में कि उसका तो कुछ नहीं बिगड़ता लेकिन मन का सारा रिश्ता–नाता तहस–नहस हो जाता है ।”
― Mahuacharit
― Mahuacharit