कोहरे में कैद रंग Quotes

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कोहरे में कैद रंग कोहरे में कैद रंग by Govind Mishra
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“नीम की डगाल से लटका मूँज की डोरियों का बना एक छींका, जिस पर रखी थी रसखीर, लाल रंग की मिट्टी की चपिया में, ढकना भी मिट्टी का। शाम पिता ने अपने आठ साल के लड़के के लिए गन्ने का रस मँगाया था और कण्डों के ऊपर रोटी-दाल के बाद मिट्टी की इस चपिया में खुद खीर पकायी थी। रात के खाने के बाद जो बची उसे उन्होंने छींके पर टाँग दिया था, बिल्ली से बचे और रात भर चाँदनी की ठण्डक चपिया में पहमती भी रहे।”
Govind Mishra, Kohre Me Kaid Rang
“आज की पीढ़ी ‘तर्क’ और ‘अपना, सिर्फ अपना’ पक्ष लेकर चलती है। वह नियति-इयति को नहीं मानती, भावना पर बहुत जोर नहीं देती।” “वह दूसरी ‘अति’ है, जहाँ दूसरे के लिए कुछ करने, दूसरे की भावनाओं का खयाल करने से ही परहेज है। जरूरत है दोनों के मिश्रण की।”
Govind Mishra, Kohre Me Kaid Rang