Samarsiddha Quotes

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Samarsiddha (Hindi Edition) Samarsiddha by Sandeep Nayyar
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Samarsiddha Quotes Showing 1-4 of 4
“हर बात किसी तर्क या प्रमाण से नहीं समझी जाती. कुछ बातें अंतर्मन से भी जानी जाती हैं.”
Sandeep Nayyar, Samarsiddha
“सुर और संगीत दोनों ही विचित्र होते हैं, जितनी कठनाई से सधते हैं, उतनी ही सरलता से फिसल जाते हैं.”
Sandeep Nayyar, Samarsiddha
“मनुष्य ही ऐसा जीव है जो अपने पिंजरे स्वयं बनाता है. जब मनुष्य की प्रवित्ति सीमाओं और बन्धनों को तोड़ कर जीने की है, जब उसकी अभिलाषा सृष्टि की ही भांति असीम और अपार हो जाने की है तो फिर ये सीमायें क्यों? क्या मनुष्य अपनी ही प्रवित्तियों से डरता है? अपनी ही अभिलाषाओं से घबराता है? शायद यही सच है.”
Sandeep Nayyar, Samarsiddha
“जिन्हें विष पीने की कला आती है वे विष से भी औषधि का काम लेलेते हैं,’ नील”
Sandeep Nayyar, Samarsiddha: