Rashtra Jeevan ki Disha Quotes

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Rashtra Jeevan ki Disha (राष्ट्र जीवन की दिशा) Rashtra Jeevan ki Disha by Deendayal Upadhyay
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“ज्ञानरहित भक्ति ढोंग है, कर्मरहित ज्ञान व्यर्थ है, भक्तिरहित कर्म नीरस होता है और ज्ञानरहित कर्म अँधा होता है। इस प्रकार भक्ति-समन्वित ज्ञानयुक्त निष्काम कर्म ही हमारा आदर्श है।”
Deendayal Upadhyay, Rashtra Jeevan ki Disha
“आत्मानुभूति के प्रयत्नों में जिन सामाजिक व्यवस्थाओं एवं पद्धतियों की राष्ट्र अपनी सहायता के लिए सृष्टि करता है, अथवा जिन रीति-रिवाजों में उसकी आत्मा की अभिव्यक्ति होती है वे ही यदि कालावपात से मार्ग में बाधक होकर उसके ऊपर भार रूप हो जाएँ तो उनसे मुक्ति पाना भी प्रत्येक राष्ट्र के लिए आवश्यक है।”
Deendayal Upadhyay, Rashtra Jeevan ki Disha